मुजफ्फरनगर में 'टॉर्चर हाउस' का भंडाफोड़: दोना फैक्ट्री से 12 बंधुआ मजदूर मुक्त।

 गर्म भाले से काटा कान, भागने पर छोड़ते थे पिटबुल, एक की हत्या, दो लापता।
 संवाददाता - योगेश कुमार
मुजफ्फरनगर। जनपद के तितावी थाना क्षेत्र के मांडी गांव से बंधुआ मजदूरी, कत्ल और हैवानियत का एक ऐसा घिनौना व रूह कंपा देने वाला चेहरा बेनकाब हुआ है, जिसे सुनकर आधुनिक समाज शर्मसार हो जाए। यहां चल रही एक दोना फैक्ट्री में मजदूरों को बंधक बनाकर उन्हें ऐसी अमानवीय यातनाएं दी जा रही थीं कि उनकी दर्दभरी दास्तान सुनकर खुद पुलिस अधिकारियों की आंखों से आंसू छलक गए। एसएसपी संजय कुमार वर्मा के सख्त निर्देशन और एसपी देहात अक्षय संजय महाडिक के नेतृत्व में संयुक्त टीम ने छापेमारी कर इस 'टॉर्चर हाउस' से 12 मजदूरों को सकुशल मुक्त कराया है।
एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने इस पूरे मामले का रोंगटे खड़े कर देने वाला खुलासा करते हुए इसे "हैवानियत का नंगा नाच" करार दिया है। इस बड़ी कामयाबी पर पुलिस टीम को 25 हजार रुपये का नकद पुरस्कार देने की घोषणा की गई है।पुलिस खुलासे के अनुसार, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा, राजस्थान और पड़ोसी देश नेपाल के गरीब मजदूरों को 10-12 हजार रुपये प्रति माह वेतन का लालच देकर यहां लाया गया था। मगर मांडी गांव पहुंचते ही वे फैक्ट्री मालिक अंकित बालियान के चंगुल में फंस गए। पिछले डेढ़ साल से इन मजदूरों को परिसर में ही बंधक बनाकर रखा गया था और उनसे बिना किसी वेतन के 24-24 घंटे काम कराया जा रहा था। गिरफ्तार सुपरवाइजर शिवा त्यागी ने कुबूल किया कि मजदूरों को कोई पैसा नहीं दिया जाता था। सुबह 4 बजे से रात 12 बजे तक काम कराया जाता और सोने के लिए महज 2 से 3 घंटे मिलते थे। खाने के नाम पर उन्हें चोकर की बनी सूखी रोटी दी जाती थी। अगर कोई बीमार भी हो जाए, तो छुट्टी नहीं मिलती थीफैक्ट्री के भीतर जुल्म की इंतेहा पार हो चुकी थी। विरोध करने वाले मजदूरों को हंटर और बेल्टों से बेरहमी से पीटा जाता था। क्रूरता की हद तो तब हो गई जब एक मजदूर का खौफ पैदा करने के लिए गर्म भाले से कान तक काट दिया गया। पुलिस ने मौके से टॉर्चर में इस्तेमाल होने वाले भाले, डंडे और बेल्ट बरामद किए हैं। मुक्त हुए मजदूरों ने रोते हुए बताया कि यदि कोई भागने की कोशिश करता, तो मालिक उसके पीछे खूंखार 'पिटबुल' डॉग छोड़ देता था। मालिक अंकित बालियान अक्सर उन्हें धमकाता था कि "तुम लोग यहां से जिंदा नहीं जाओगेइस खौफनाक कहानी का अंत सिर्फ प्रताड़ना तक सीमित नहीं था। फैक्ट्री से तीन मजदूर गायब थे, जिनमें से नेपाल निवासी अर्जुन की लाश नवंबर 2025 में ही एक बोरे में बंद लावारिस हालत में बरामद हो चुकी है। आशंका जताई जा रही है कि यातनाओं के कारण मरने वाले मजदूरों के शवों को आरोपी लावारिस फेंक देते थे। दो अन्य लापता मजदूरों का सुराग लगाने की कोशिश की जा रही है।
फैक्ट्री सील: पिता व सुपरवाइजर गिरफ्तार-
पुलिस की संयुक्त टीम, जिसमें सीओ फुगाना विश्वजीत सिंह, सहायक श्रम आयुक्त देवेश सिंह, तहसीलदार राधेश्याम गौड और तितावी थाना प्रभारी प्रमोद कुमार शामिल थे, ने भारी पुलिस बल के साथ दबिश देकर फैक्ट्री मालिक के पिता प्रदीप बालियान और सुपरवाइजर शिवा त्यागी को धर दबोचा। हालांकि, मुख्य आरोपी अंकित बालियान और उसका एक साथी अभी फरार हैं, जिनकी तलाश में एसओजी प्रभारी मोहित चौधरी व तितावी पुलिस की टीमें दबिश दे रही हैं।
मानव तस्करी का मामला-
कड़ी धाराओं में मुकदमा दर्ज: श्रम विभाग ने फैक्ट्री को सील करने की कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस ने फरार आरोपियों के खिलाफ मानव तस्करी (Human Trafficking), बंधुआ मजदूरी अधिनियम, हत्या (IPC 302), और एससी/एसटी एक्ट समेत कई संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई तेज कर दी है।

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