संवाददाता - योगेश कुमार
मुजफ्फरनगर। जिले के बहुचर्चित राजेंद्र सैनी हत्याकांड में अदालत ने सख्त फैसला सुनाते हुए दो दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/त्वरित न्यायालय कोर्ट संख्या-03 के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने इस मामले को “दुर्लभतम श्रेणी का अपराध” मानते हुए यह निर्णय दिया।अदालत ने टिप्पणी में कहा कि दोषियों ने यह सोचकर अपराध किया था कि “लाश नहीं तो केस नहीं”, लेकिन कानून की नजर से कोई भी अपराध छिप नहीं सकता और सच्चाई अंततः सामने आ ही जाती है।अभियोजन पक्ष के अनुसार, 5 जून 2018 को मीरापुर थाना क्षेत्र के खेड़ी गांव के जंगल में एक जला हुआ शव बरामद हुआ था। बाद में मृतक की पहचान राजेंद्र सैनी के रूप में हुई।जांच में सामने आया कि मामले में नामजद आरोपी वीरसैन को शक था कि मृतक उसकी पत्नी से बातचीत करता था। इसी रंजिश में उसने अपने साथियों के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची।अभियोजन के मुताबिक, आरोपियों ने पहले राजेंद्र सैनी को शराब पिलाई और फिर गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद पहचान छिपाने के लिए शव को जलाकर जंगल में फेंक दिया गया।
मामले में अन्य दोषियों में गजेंद्र उर्फ गीलू और राम किरण उर्फ सावन शामिल थे। सुनवाई के दौरान मुख्य आरोपी वीरसैन की मृत्यु हो चुकी थी, जबकि शेष दो आरोपियों के खिलाफ मुकदमा जारी रहा।
अदालत ने दोनों दोषियों को मृत्युदंड के साथ एक-एक लाख रुपये के अर्थदंड की सजा भी सुनाई है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यह अपराध अत्यंत क्रूर और समाज को झकझोर देने वाला है, इसलिए कठोरतम सजा आवश्यक है। करीब आठ वर्ष की लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद आए इस फैसले से पीड़ित पक्ष ने राहत और संतोष व्यक्त किया है।
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