50 वर्षों से निस्वार्थ सेवा में जुटे 'मकनू पंडित', रोज़ सुबह पूरे गांव की करते हैं सफाई।

महात्मा गांधी के विचारों से प्रेरित होकर छोड़ी सरकारी नौकरी, स्वच्छता को बनाया जीवन का संकल्प।
संवाददाता -अबुल कैश 
निजामाबाद/आजमगढ़। तहसील क्षेत्र के हुसामपुर बड़ागांव निवासी राधेश्याम मिश्र उर्फ 'मकनू पंडित' पिछले लगभग 50 वर्षों से बिना किसी सरकारी सहायता या पारिश्रमिक के प्रतिदिन पूरे गांव की साफ-सफाई कर समाज सेवा की अनूठी मिसाल पेश कर रहे हैं। वह रोज सुबह करीब पांच बजे से दस बजे तक हाथ में झाड़ू, खांची और फावड़ा लेकर गांव की गलियों, सार्वजनिक स्थलों और मंदिर परिसर की सफाई करते हैं तथा कूड़े-कचरे को स्वयं उठाकर निर्धारित स्थान तक पहुंचाते हैं।
राधेश्याम मिश्र ने बताया कि युवावस्था में महात्मा गांधी जयंती के अवसर पर दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में गांधीजी के स्वच्छता संबंधी विचारों से प्रेरित होकर उन्होंने समाज सेवा का संकल्प लिया। उस समय वह रोडवेज में परिचालक (कंडक्टर) के पद पर कार्यरत थे, लेकिन समाज सेवा को प्राथमिकता देते हुए उन्होंने नौकरी छोड़ दी और अपने संसाधनों से सफाई कार्य शुरू किया, जो आज भी निरंतर जारी है।
उनका कहना है कि स्वच्छ वातावरण से लोगों का स्वास्थ्य बेहतर रहता है और बीमारियों की संभावना कम होती है। गांव के लोगों के अनुसार मकनू पंडित की निस्वार्थ सेवा नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है। ग्रामीणों का मानना है कि यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने आसपास की स्वच्छता की जिम्मेदारी निभाए, तो समाज को स्वच्छ और स्वस्थ बनाया जा सकता है। आज मकनू पंडित की सेवा पूरे क्षेत्र में समर्पण, स्वच्छता और समाज सेवा की मिसाल बन चुकी है।

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