बड़ी खबर: आरक्षण खत्म करने की मांग पर चिराग पासवान का दो टूक जवाब—‘आरक्षण कोई खैरात नहीं, संवैधानिक अधिकार है’

जाति आधारित आरक्षण के विरोध में हो रहे प्रदर्शनों पर बोले केंद्रीय मंत्री, संवाद से दूर होगा भ्रम; SC-ST के साथ भेदभाव का हवाला देकर आरक्षण को बताया जरूरी।
नई दिल्ली। जाति आधारित आरक्षण को समाप्त करने की मांग को लेकर चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने आरक्षण व्यवस्था को लेकर स्पष्ट रुख सामने रखा है। उन्होंने कहा कि आरक्षण किसी के कहने से समाप्त होने वाली व्यवस्था नहीं है और न ही यह किसी को दी जाने वाली खैरात है। आरक्षण देश के संविधान द्वारा दिया गया अधिकार है।https://www.instagram.com/reel/DcXdIV3xAhJ/?igsi=MTdtbW5zdzU5M2lvZw==
चिराग पासवान ने कहा कि जो लोग आरक्षण समाप्त करने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, उनसे बातचीत और संवाद की आवश्यकता है। उनके मुताबिक, जब प्रदर्शनकारियों के साथ बैठकर चर्चा की जाएगी तो उन्हें भी आरक्षण के पीछे की सामाजिक और संवैधानिक व्यवस्था को समझने का अवसर मिलेगा।
केंद्रीय मंत्री ने अपने बयान में सामाजिक भेदभाव के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों के साथ लंबे समय से भेदभाव की स्थिति रही है और इसी सामाजिक असमानता को दूर करने के लिए आरक्षण की व्यवस्था महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से जुड़े हालिया घटनाक्रम का उदाहरण देते हुए सामाजिक भेदभाव की गंभीरता की ओर ध्यान आकर्षित किया। चिराग पासवान का कहना है कि जब समाज के वंचित वर्गों के साथ आज भी भेदभाव की घटनाएं सामने आती हैं, तो ऐसे में आरक्षण की जरूरत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि आरक्षण को लेकर किसी भी तरह की बहस या विरोध का समाधान टकराव से नहीं, बल्कि संवाद और संवैधानिक व्यवस्था की समझ से होना चाहिए। उनके बयान के बाद आरक्षण के मुद्दे पर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज होने के आसार हैं।

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