गंभीरवन गांव में लंबे समय से लंबित है चकबंदी का मामला, ग्रामीणों ने सप्ताहवार समीक्षा कर शीघ्र प्रक्रिया पूरी कराने की उठाई मांग।
संवाददाता -धीरज वर्मा
आजमगढ़। रानी की सराय विकासखंड क्षेत्र के ग्राम पंचायत गंभीरवन के ग्रामीणों ने गांव में लंबित चकबंदी प्रक्रिया को गति देने और निर्धारित समय में पूरा कराने की मांग को लेकर जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र सौंपा। ग्रामीणों का कहना है कि चकबंदी प्रक्रिया लंबे समय से विभिन्न कारणों से प्रभावित है, जिसके चलते किसानों और ग्रामसभा के लोगों को भूमि संबंधी मामलों में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार गंभीरवन गांव में आजादी के बाद से अब तक चकबंदी की प्रक्रिया पूरी तरह संपन्न नहीं हो सकी। हालांकि, वर्ष 1973 से 2018 के बीच गांव चकबंदी प्रक्रिया के अंतर्गत रहा। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि इस दौरान चकबंदी अभिलेखों में कथित अनियमित इंद्राज किए गए, जिससे भूमि संबंधी विवाद और अन्य समस्याएं उत्पन्न हुईं। प्रार्थना पत्र में कुछ चकबंदी कर्मचारियों और भू-माफिया तत्वों की कथित मिलीभगत का भी आरोप लगाया गया है।
ग्रामीणों के मुताबिक इन विवादों के बीच 20 अगस्त 2018 को धारा 6 का प्रकाशन कर चकबंदी प्रक्रिया समाप्त कर दी गई। इसके बाद ग्रामीणों ने लगातार शासन और प्रशासन से पत्राचार कर प्रक्रिया दोबारा शुरू कराने की मांग की। उनके अनुसार इसी क्रम में 2 सितंबर 2024 को गांव में धारा 4 का प्रकाशन किया गया और गांव को दोबारा चकबंदी विभाग के अधीन कर दिया गया।
ग्रामीणों का दावा है कि इसके बाद कुछ लोगों ने चकबंदी प्रक्रिया में बाधा डालने के उद्देश्य से उच्च न्यायालय में रिट याचिका दाखिल की थी, जिसे 30 अप्रैल 2026 को न्यायालय ने खारिज कर दिया। इसके बावजूद चकबंदी कार्य में अपेक्षित तेजी नहीं आई है।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की गंभीरता से समीक्षा कराने, संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देने और चकबंदी प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से जल्द पूरा कराने की मांग की है। उनका कहना है कि प्रक्रिया पूरी होने से किसानों और ग्रामसभा के लोगों को भूमि संबंधी मामलों के निस्तारण में राहत मिलेगी।
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