कई पालियों में परीक्षा कराने और अंकों के सामान्यीकरण को लेकर उठे सवालों पर अदालत की टिप्पणी, ठोस अवैधता या मनमानी के बिना परिणाम से असंतुष्टि को चुनौती का पर्याप्त आधार नहीं माना!
प्रयागराज। शिक्षक पात्रता परीक्षा में कई पालियों में परीक्षा कराने और अंकों के नॉर्मलाइजेशन (सामान्यीकरण) से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। 15 अक्टूबर 2026 के आदेश के उपलब्ध अंश के अनुसार, न्यायमूर्ति विनोद दीवाकर ने मामले में हस्तक्षेप करने का पर्याप्त आधार नहीं पाया।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त होने के कारण परीक्षा कई पालियों में कराना आवश्यक हुआ। ऐसी परिस्थितियों में अलग-अलग पालियों में शामिल अभ्यर्थियों के अंकों की निष्पक्ष तुलना सुनिश्चित करने के लिए नॉर्मलाइजेशन एक मान्य और स्थापित प्रक्रिया है।
अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि याचिकाकर्ताओं ने 15 मार्च 2021 के विज्ञापन और 22 जून 2026 की परीक्षा समय-सारणी को उचित समय पर चुनौती नहीं दी थी। वे परीक्षा में शामिल हुए और आवश्यक क्वालीफाइंग अंक हासिल नहीं कर पाने के बाद अदालत पहुंचे। आदेश के मुताबिक, नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया को अपनाने या लागू करने में किसी ठोस अवैधता अथवा मनमानी का प्रमाण सामने आए बिना केवल प्रतिकूल परिणाम के आधार पर चुनौती स्वीकार नहीं की जा सकती।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध रिकॉर्ड पर विचार करने के बाद याचिका खारिज कर दी। हालांकि, उपलब्ध दस्तावेज के इस अंश से संबंधित शिक्षक पात्रता परीक्षा की पूरी पहचान और फैसले का व्यापक प्रभाव स्पष्ट नहीं होता।
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