ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने समाजवादी पार्टी पर साधा निशाना, बोले—मुस्लिम समाज के हक, सुरक्षा और अधिकारों के लिए मुश्किल वक्त में सड़क पर क्यों नहीं उतरे सपा के नेता?
लखनऊ। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय प्रवक्ता शादाब चौहान ने समाजवादी पार्टी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। एक निजी टीवी कार्यक्रम में बातचीत के दौरान उन्होंने मुस्लिम समाज के राजनीतिक समर्थन और समाजवादी पार्टी की भूमिका को लेकर कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मुसलमानों ने करीब 34 वर्षों तक समाजवादी पार्टी को अपना राजनीतिक समर्थन और वोट दिया, लेकिन इसके बदले उन्हें मुजफ्फरनगर दंगे जैसी घटनाओं और भारतीय जनता पार्टी के शासनकाल में कथित ज्यादतियों के मुद्दे पर खामोशी देखने को मिली।
शादाब चौहान ने सवाल उठाया कि जब समाजवादी पार्टी सत्ता में थी, उस समय भी मुस्लिम समाज से जुड़े कई गंभीर मुद्दे सामने आते रहे। ऐसे समय में पार्टी के मुस्लिम नेताओं और यादव समाज के प्रभावशाली नेताओं ने मुस्लिम समाज के अधिकारों और सुरक्षा के लिए कितनी मजबूती से आवाज उठाई? उन्होंने आरोप लगाया कि जब मुस्लिम समाज के साथ अन्याय और उत्पीड़न की शिकायतें सामने आईं, तब समाजवादी पार्टी के नेता खुलकर उनके समर्थन में सड़क पर उतरते दिखाई नहीं दिए।
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन प्रवक्ता ने अपने बयान में मुजफ्फरनगर दंगे का जिक्र करते हुए समाजवादी पार्टी के पुराने राजनीतिक रिकॉर्ड पर सवाल खड़े किए। उनका कहना था कि मुस्लिम समाज ने लंबे समय तक सपा को अपना समर्थन दिया और चुनावों में पार्टी की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, लेकिन अब यह सवाल पूछा जाना जरूरी है कि उस समर्थन के बदले समुदाय को क्या हासिल हुआ?
उन्होंने भाजपा सरकार के कार्यकाल में मुस्लिम समाज से जुड़े मुद्दों पर भी समाजवादी पार्टी की भूमिका को कठघरे में खड़ा किया। शादाब चौहान ने सवाल किया कि यदि सपा वास्तव में मुस्लिम समाज की हितैषी होने का दावा करती है, तो उसे यह बताना चाहिए कि समुदाय के अधिकारों, सुरक्षा और सम्मान से जुड़े मामलों में उसने जमीन पर क्या संघर्ष किया?
उनके इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी और एआइएमआइएम के बीच मुस्लिम मतदाताओं को लेकर जारी राजनीतिक खींचतान एक बार फिर चर्चा में आ गई है। प्रदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच मुस्लिम मतदाताओं का समर्थन सभी राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे में एआइएमआइएम लगातार सपा की राजनीति और मुस्लिम समाज के प्रति उसकी जवाबदेही पर सवाल उठा रही है।
शादाब चौहान के बयान को समाजवादी पार्टी के परंपरागत मुस्लिम जनाधार को लेकर एआइएमआइएम की राजनीतिक रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है। हालांकि, उनके आरोपों पर समाजवादी पार्टी की प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या मुस्लिम मतदाता आगामी विधानसभा चुनाव में भी पुराने राजनीतिक समीकरणों के साथ जाएंगे या अपने राजनीतिक समर्थन और प्रतिनिधित्व को लेकर नए विकल्पों पर विचार करेंगे?
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