संवाददाता -राकेश गौतम
आजमगढ़ : जनपद में 1 जनवरी को चन्द्रजीत यादव की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने उन्हें एक दूरदर्शी, अनुकरणीय और अतुलनीय राजनेता के रूप में याद किया। वक्ताओं ने कहा कि चन्द्रजीत यादव केवल सत्ता की राजनीति तक सीमित नहीं थे, बल्कि उन्होंने हमेशा मजदूरों, किसानों, महिलाओं, दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक असमानताओं के विरुद्ध उनका पूरा जीवन समर्पित रहा।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि चन्द्रजीत यादव एक सच्चे समाजवादी चिंतक थे, जिनकी नस-नस में समाजवाद बसा था। उन्होंने कभी भी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया और संसद से लेकर आंदोलनों तक सामाजिक न्याय की अवधारणा को मजबूती से रखा। 1967 में संसद में पहुंचने के बाद उन्होंने अपनी ही पार्टी की सरकार को भी सामाजिक विषमताओं के सवाल पर घेरा और गरीबों व हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज बुलंद की।
वक्ताओं ने विशेष रूप से यह भी कहा कि चन्द्रजीत यादव ने 1977 में ही फासीवादी और सांप्रदायिक ताकतों के उभार को पहचान लिया था और देश को इसके खतरों से आगाह किया था। उनका मानना था कि लोकतंत्र कमजोर हुआ तो देश कमजोर हो जाएगा और चुनाव के जरिए सत्ता में आई गलत सोच वाली सरकार भी तानाशाही का रूप ले सकती है। आज के हालात को देखते हुए वक्ताओं ने कहा कि चन्द्रजीत यादव की चेतावनियां सच साबित होती नजर आ रही हैं। कार्यक्रम में प्रो. डॉ. नागेंद्र नाथ यादव, चंद्रपाल सिंह यादव, प्रो. डॉ. जहूर आलम, विजय यादव सहित कई बुद्धिजीवी, सामाजिक कार्यकर्ता और अधिवक्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम का आयोजन सामाजिक न्याय एवं बाल भवन केंद्र के निदेशक रामजनम यादव ने किया। अध्यक्षता राष्ट्रीय सामाजिक न्याय आंदोलन के अध्यक्ष रामकुमार यादव ने की, जबकि संचालन महासचिव अरविंद कुमार भारती एडवोकेट ने किया।
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