आजमगढ़ रिंग रोड पर श्रेय की सियासत तेज, सपा–भाजपा आमने-सामने, निरहुआ के दावे और युवा भाजपा नेता विनीत सिंह रिशु की तीखी प्रतिक्रिया।

पूर्व सांसद दिनेश लाल यादव निरहुआ ने भी सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के प्रति आभार जताया है। 
आजमगढ़ : जनपद में प्रस्तावित रिंग रोड और बाईपास परियोजना को लेकर राजनीतिक श्रेय की जंग तेज हो गई है। एक ओर समाजवादी पार्टी इस परियोजना को अपने प्रयासों का नतीजा बता रही है, तो वहीं भारतीय जनता पार्टी ने इसे पूर्व सांसद दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ के कार्यकाल की उपलब्धि बताया है। इस मुद्दे पर अब सपा और भाजपा खुलकर आमने-सामने आ गई हैं।
हाल ही में सांसद धर्मेंद्र यादव के समर्थन में अतरौलिया विधायक डॉ. संग्राम यादव द्वारा सोशल मीडिया पर साझा की गई पोस्ट में रिंग रोड परियोजना को सपा के प्रयासों का परिणाम बताया गया। इसके बाद भाजपा की ओर से युवा भाजपा नेता विनीत सिंह रिशु ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आजमगढ़ रिंग रोड और बाईपास की नींव पूर्व सांसद निरहुआ के कार्यकाल में पड़ी थी। उन्होंने दावा किया कि निरहुआ ने व्यक्तिगत रूप से केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात कर पत्र सौंपा था और लगातार इस परियोजना के लिए प्रयास किए थे।
विनीत सिंह रिशु ने आरोप लगाया कि अब जब परियोजना को मंजूरी मिल चुकी है और काम धरातल पर उतर रहा है, तो सपा नेता केवल फोटो और पोस्ट के जरिए श्रेय लेने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आजमगढ़ की जनता भली-भांति जानती है कि किसने वास्तव में विकास के लिए मेहनत की और कौन सिर्फ सोशल मीडिया के जरिए वाहवाही लूटना चाहता है।
इधर, पूर्व सांसद दिनेश लाल यादव निरहुआ ने भी सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के प्रति आभार जताया है। निरहुआ ने बताया कि आजमगढ़ शहर को जाम की समस्या से निजात दिलाने के उद्देश्य से उन्होंने केंद्रीय मंत्री से रिंग रोड के निर्माण का अनुरोध किया था, जिसे स्वीकार करते हुए ₹1279.13 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है। इस परियोजना में 4-लेन बाईपास रोड, नए फ्लाईओवर समेत अन्य महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं, जो आजमगढ़ की यातायात व्यवस्था और विकास में अहम भूमिका निभाएंगे।
रिंग रोड जैसी बड़ी परियोजना, जो आजमगढ़ के भविष्य के विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, अब राजनीतिक श्रेय की होड़ का केंद्र बन गई है। सोशल मीडिया पर सपा और भाजपा समर्थकों के बीच तीखी बहस जारी है, वहीं आम जनता के बीच यह सवाल उठ रहा है कि विकास कार्यों से ज्यादा राजनीतिक दलों के लिए श्रेय की राजनीति क्यों हावी होती जा रही है।

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