बड़ी खबर : 27% OBC आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम रोक, सियासी घमासान तेज।

कांग्रेस ने बनाया ‘ओबीसी अधिकार आंदोलन’, बीजेपी 50% सीमा के दबाव में।
मध्य प्रदेश। प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण का मामला एक बार फिर सियासत के केंद्र में आ गया है। 2019 में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में OBC आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किया गया था, जिससे राज्य में कुल आरक्षण का आंकड़ा 63 प्रतिशत तक पहुंच गया। इसी पर अब सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगाते हुए सवाल उठाया है कि मौजूदा सरकार इसे लागू क्यों नहीं कर रही है।
कमलनाथ–जीतू पटवारी के नेतृत्व में कांग्रेस का आक्रामक रुख।
कांग्रेस ने इस मुद्दे को महज कानूनी विवाद न मानते हुए इसे ‘ओबीसी अधिकार आंदोलन’ का रूप दे दिया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता कमलनाथ और प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी लगातार सरकार पर ओबीसी विरोधी होने का आरोप लगा रहे हैं। कांग्रेस का दावा है कि प्रदेश की करीब 48 प्रतिशत ओबीसी आबादी के हक को छीना जा रहा है और यही मुद्दा आने वाले चुनावों में निर्णायक बनेगा।
50% आरक्षण सीमा में उलझी बीजेपी।
दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी 50 प्रतिशत आरक्षण की संवैधानिक सीमा और सामाजिक संतुलन के दबाव में फंसी नजर आ रही है। भाजपा सरकार का तर्क है कि बिना कानूनी अड़चनों को दूर किए 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करना संभव नहीं है, जबकि विपक्ष इसे सिर्फ बहाना बता रहा है।
राजनीतिक जानकारों की मानें तो OBC आरक्षण का यह मुद्दा आने वाले लोकसभा और निकाय चुनावों में बड़ा प्रभाव डाल सकता है। एक तरफ कांग्रेस इसे सामाजिक न्याय से जोड़कर जनता के बीच ले जा रही है, तो दूसरी तरफ भाजपा के लिए यह संवैधानिक और राजनीतिक संतुलन की कठिन परीक्षा बनता जा रहा है।

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