नक्सलवाद पूरी तरह खत्म नहीं’, जमीनी समस्याओं को बताया मूल कारण।
आदिवासी अधिकार, जवानों के सम्मान और विकास मॉडल पर सरकार को घेरा।
नई दिल्ली/आजमगढ़। समाजवादी पार्टी के नेता, मुख्य सचेतक एवं सांसद धर्मेंद्र यादव ने लोकसभा में नक्सलवाद के मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए केंद्र सरकार के दावों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद देश की गंभीर समस्या रही है, जिसमें सुरक्षा बलों के जवानों ने बड़ी कुर्बानियां दी हैं, लेकिन इसे पूरी तरह समाप्त बताना वास्तविक स्थिति से अलग है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के चंदौली, मिर्जापुर और सोनभद्र जैसे सीमावर्ती जिलों का जिक्र करते हुए कहा कि ये क्षेत्र झारखंड और छत्तीसगढ़ से सटे होने के कारण पहले भी प्रभावित रहे हैं। साथ ही उन्होंने पुराने घटनाक्रमों का हवाला देते हुए बताया कि संवाद और संयम की नीति अपनाकर कई नक्सलियों को मुख्यधारा में लाया गया था, जिसका सकारात्मक असर देखने को मिला।
सांसद ने नक्सलवाद के पीछे गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा, असमानता और प्रशासनिक दबाव जैसे कारणों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि जब तक इन बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं होगा, तब तक इस चुनौती से स्थायी तौर पर निपटना संभव नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी क्षेत्रों में अब भी कुपोषण, शिक्षा की कमी, भूमि विवाद और स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव जैसी समस्याएं बनी हुई हैं और योजनाओं का लाभ पूरी तरह नहीं पहुंच पा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि केवल सुरक्षा बलों के जरिए समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार जरूरी है।
इस दौरान उन्होंने पैरामिलिट्री फोर्सेस के जवानों को ‘शहीद’ का दर्जा देने की मांग भी उठाई और कहा कि देश के लिए बलिदान देने वाले जवानों को पूरा सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने छत्तीसगढ़, ओडिशा, महाराष्ट्र और झारखंड जैसे राज्यों का जिक्र करते हुए कहा कि वहां अब भी नक्सल प्रभाव बना हुआ है और लोगों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। अंत में उन्होंने समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव की ओर से केंद्र सरकार से अपील की कि आदिवासी समाज के अधिकारों की रक्षा की जाए और उन्हें न्याय, सम्मान व बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।
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