मानवता की मिसाल: सड़क हादसे में घायल युवक को युवाओं और डॉक्टरों ने दी नई जिंदगी।

45 मिनट तक सड़क पर तड़पता रहा युवक, तीन युवकों की हिम्मत और डॉक्टरों की तत्परता से बची जान।
संवाददाता - धीरज वर्मा आजमगढ़ 
आजमगढ़। जिले में इंसानियत, साहस और संवेदनशीलता की एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने समाज को झकझोर कर रख दिया है और साथ ही यह भी साबित कर दिया है कि समय पर उठाया गया एक कदम किसी की जिंदगी बचा सकता है। 15 मार्च को गाजीपुर जनपद के बहरियाबाद क्षेत्र में एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ, जिसमें 18 वर्षीय मोनू चौहान गंभीर रूप से घायल हो गया। उसकी बाइक एक तेज रफ्तार ट्रक से टकरा गई, जिसके बाद वह सड़क किनारे गिरकर बुरी तरह तड़पता रहा।
हैरानी की बात यह रही कि लगभग 45 मिनट तक वहां से गुजरने वाले लोग केवल तमाशबीन बने रहे, लेकिन किसी ने मदद करने की हिम्मत नहीं दिखाई। इसी बीच अनिल यादव, स्वतंत्र सिंह और संदीप चौहान नामक तीन युवकों ने मानवता का परिचय देते हुए बिना किसी डर या झिझक के घायल युवक को उठाया और तत्काल आजमगढ़ के लाइफलाइन अस्पताल पहुंचाया।
अस्पताल पहुंचते ही इमरजेंसी विभाग के डॉक्टरों ने बिना किसी औपचारिकता या आर्थिक स्थिति की चिंता किए इलाज शुरू कर दिया। वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अनूप ने जांच के दौरान पाया कि युवक को गंभीर अंदरूनी चोटें आई हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तुरंत ऑपरेशन का निर्णय लिया गया और पहली सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। हालांकि अगले दिन युवक की हालत एक बार फिर बिगड़ गई, जिसके बाद डॉक्टरों को दूसरी जटिल सर्जरी करनी पड़ी। डॉ. अनूप और उनकी टीम ने पूरी मेहनत और सूझबूझ के साथ दूसरी सर्जरी भी सफलतापूर्वक पूरी की। लगातार निगरानी और इलाज के बाद अब युवक की हालत में काफी सुधार है और वह जल्द ही घर लौटने के लिए तैयार है।
अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि उनका संस्थान हमेशा से ऐसे लावारिस और गंभीर मरीजों के इलाज के लिए तत्पर रहता है। उन्होंने आम लोगों से अपील की कि सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों की मदद के लिए आगे आएं और “राहवीर” जैसी योजनाओं से प्रेरणा लें।
यह घटना न केवल मानवता की एक बड़ी मिसाल है, बल्कि यह भी संदेश देती है कि अगर समाज के लोग संवेदनशील बनें और समय पर मदद करें, तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ