शिक्षकों पर दोहरा नहीं, तिहरा बोझ—पढ़ाई के साथ सर्वे और तैयारी की चुनौती।

SIR, जनगणना और अन्य कार्यों में उलझे शिक्षक।
TET जैसी परीक्षाओं की तैयारी के लिए नहीं मिल रहा समय।
उत्तर प्रदेश। प्रदेश में शिक्षकों के सामने इन दिनों एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। एक तरफ उन्हें स्कूलों में नियमित पढ़ाई करानी है, वहीं दूसरी ओर SIR (स्कूल इंफॉर्मेशन रिपोर्ट), विभिन्न सर्वे कार्य और जनगणना जैसे गैर-शैक्षणिक दायित्व भी निभाने पड़ रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर शिक्षक TET जैसे महत्वपूर्ण परीक्षा की तैयारी कब करें?
शिक्षकों का कहना है कि पहले से ही स्कूलों में पढ़ाई का दबाव रहता है, ऊपर से प्रशासनिक कार्यों की जिम्मेदारी भी दे दी जाती है। SIR, डाटा फीडिंग, वोटर लिस्ट अपडेट, जनगणना और अन्य सरकारी कार्यों में लगने के कारण उन्हें पर्याप्त समय नहीं मिल पाता।
विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षकों से अत्यधिक गैर-शैक्षणिक कार्य लेने से शिक्षा की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है। जब शिक्षक पढ़ाने के बजाय कागजी और सर्वे कार्यों में अधिक समय देंगे, तो इसका सीधा असर छात्रों की पढ़ाई पर पड़ेगा। शिक्षकों की मांग है कि उन्हें केवल शैक्षणिक कार्यों तक सीमित रखा जाए या फिर गैर-शैक्षणिक कार्यों के लिए अलग से स्टाफ की व्यवस्था की जाए, ताकि वे अपनी पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर भी ध्यान दे सकें।
अब बड़ा सवाल यही है—
क्या सरकार शिक्षकों के इस बढ़ते बोझ को कम करेगी, या फिर शिक्षक इसी तरह पढ़ाई, सरकारी कार्य और अपनी तैयारी के बीच संतुलन बनाने को मजबूर रहेंगे?

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