पूर्व IAS नागेंद्र प्रताप सिंह ने दिया ‘मूल से आधुनिकता’ का मंत्र, वैदिक व आधुनिक शिक्षा के समन्वय पर जोर।
संवाददाता - धीरज वर्मा
आजमगढ़ : जनपद के परानापुर, घोरठ क्षेत्र में ‘विद्या कास मास किडज़ी स्कूल’ का भव्य शुभारंभ सोमवार को संपन्न हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में भारतीय शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष एवं पूर्व आईएएस नागेंद्र प्रताप सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर विद्यालय का लोकार्पण किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अभिभावक, शिक्षाविद और स्थानीय गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में नागेंद्र प्रताप सिंह ने भारतीय शिक्षा पद्धति को पुनः सशक्त बनाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि पारंपरिक भारतीय ज्ञान प्रणाली को आधुनिक शिक्षा के साथ जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि “मैकाले की शिक्षा प्रणाली की सीमाओं से बाहर निकलकर हमें भारतीय मूल्यों, संस्कृति और दर्शन को 21वीं सदी की तकनीकी दक्षताओं—जैसे क्रिटिकल थिंकिंग, डिजिटल लिटरेसी और इनोवेशन—के साथ समाहित करना होगा।”
उन्होंने बाल्यावस्था को शिक्षा का सबसे महत्वपूर्ण चरण बताते हुए कहा कि शिशु से 14 वर्ष तक की आयु बच्चों के मानसिक और बौद्धिक विकास का स्वर्णिम काल होता है। इस दौरान दिए गए संस्कार और शिक्षा जीवनभर प्रभाव डालते हैं। इसलिए इस स्तर पर भारतीय संस्कृति और आधुनिक कौशल दोनों का संतुलन जरूरी है।
कार्यक्रम में छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने उन्हें केवल नौकरी पाने वाला नहीं, बल्कि रोजगार सृजन करने वाला बनने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि हर विद्यार्थी को अपने हुनर को पहचानकर उसे विकसित करना चाहिए ताकि देश को पुनः ‘विश्व गुरु’ के रूप में स्थापित किया जा सके।
इसके साथ ही उन्होंने योग, आयुर्वेद और भारतीय जीवन पद्धति को शिक्षा का अभिन्न हिस्सा बनाने पर जोर दिया। उनका कहना था कि जब तक विद्यार्थी शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से संतुलित नहीं होगा, तब तक वह वैश्विक स्तर पर नेतृत्व नहीं कर सकता।
इस अवसर पर विद्यालय में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्रों को पदक और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया, जिससे बच्चों में उत्साह का माहौल देखने को मिला। विद्यालय प्रबंधन ने बताया कि ‘विद्या कास मास किडज़ी स्कूल’ में वैदिक मूल्यों, संस्कृत और नैतिक शिक्षा के साथ-साथ कोडिंग, रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक शिक्षा को भी शामिल किया जाएगा, ताकि छात्रों को समग्र और संतुलित शिक्षा मिल सके। कार्यक्रम के अंत में विद्यालय प्रबंधन ने मुख्य अतिथि एवं सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया।
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