संसद में धर्मेंद्र यादव ने आंध्र प्रदेश पुनर्गठन संशोधन विधेयक का समर्थन किया, उठाए कई अहम सवाल।

किसानों के मुआवजे, राजधानी और निवेश को लेकर सरकार को घेरा, विशेष राज्य दर्जे की मांग का किया समर्थन।
संवाददाता -राकेश गौतम 
नई दिल्ली/आजमगढ़। धर्मेंद्र यादव ने संसद में आंध्र प्रदेश पुनर्गठन संशोधन अधिनियम 2026 पर चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी की ओर से अपने विचार रखते हुए विधेयक का समर्थन किया, साथ ही कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए। उन्होंने कहा कि यदि इस विधेयक को पहले से अधिसूचित किया गया होता तो इस पर व्यापक चर्चा संभव हो पाती। उन्होंने आंध्र प्रदेश के टीडीपी और एनडीए सदस्यों से सवाल करते हुए कहा कि विशाखापत्तनम स्वाभाविक रूप से राजधानी के रूप में विकसित हो रहा था, जिसे स्वीकार कर लिया जाता तो किसानों की जमीन और भारी निवेश की आवश्यकता नहीं पड़ती।
उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव का स्पष्ट मत है कि देश का हर राज्य विकसित होना चाहिए और बिना स्थायी राजधानी के किसी भी राज्य का समुचित विकास संभव नहीं है। धर्मेंद्र यादव ने किसानों के मुद्दे को उठाते हुए कहा कि भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 के अनुसार क्या किसानों को चार गुना मुआवजा और प्लॉट मिला है, यह एक बड़ा सवाल है।
उन्होंने निवेश के दावों पर भी सवाल खड़े करते हुए कहा कि आंध्र प्रदेश में पांच लाख करोड़ रुपये के निवेश की बात कही जा रही है, जबकि उत्तर प्रदेश में पंद्रह लाख करोड़ रुपये के समझौते होने के बावजूद जमीनी स्तर पर बहुत कम काम हुआ है। साथ ही उन्होंने अयोध्या के किसानों के मुआवजे का मुद्दा उठाते हुए कहा कि उन्हें अभी तक पूरा भुगतान नहीं मिला है।
धर्मेंद्र यादव ने बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने के मुद्दे पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि पूर्व में किए गए वादों को पूरा नहीं किया गया, इसलिए आंध्र प्रदेश के नेताओं को सतर्क रहना चाहिए। उन्होंने समाजवादी विचारधारा के प्रतीक मुलायम सिंह यादव का उल्लेख करते हुए कहा कि वे छोटे राज्यों के विरोधी रहे हैं, क्योंकि ऐसे राज्यों में आत्मनिर्भरता की कमी होती है और वे केंद्र पर अधिक निर्भर रहते हैं।
अंत में उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश की जनता की विशेष राज्य दर्जे की मांग को ध्यान में रखते हुए समाजवादी पार्टी और उसके नेतृत्व की ओर से इस मांग का पुरजोर समर्थन किया जाता है, ताकि किसानों और आम जनता के हितों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।

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