अयोध्या में मायावती की हुंकार, लखनऊ में अखिलेश का ब्राह्मण कार्ड; 2027 से पहले बदल रहे हैं यूपी के सियासी समीकरण?

22-23 जून को BSP की अयोध्या रैली और 17 जून को सपा की ब्राह्मण नेताओं के साथ बैठक ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल, जातीय और सामाजिक समीकरणों पर फिर केंद्रित हुई राजनीति।
लखनऊ : उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज होती दिखाई दे रही हैं। एक ओर बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती 22 और 23 जून को अयोध्या में बड़ी रैली करने जा रही हैं, तो दूसरी ओर समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 17 जून को लखनऊ में ब्राह्मण नेताओं की महत्वपूर्ण बैठक बुलाकर नए राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है। दोनों दल अपने-अपने सामाजिक आधार को मजबूत करने के साथ-साथ नए वोट बैंक में भी सेंध लगाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
                 मायावती की अयोध्या रैली को दलित, पिछड़ा और सर्वजन समीकरण को फिर से साधने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं, अखिलेश यादव ब्राह्मण नेताओं के साथ संवाद बढ़ाकर सपा के PDA (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) फार्मूले के साथ सवर्ण वर्ग को भी जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं।
अयोध्या और लखनऊ में होने वाले ये दोनों कार्यक्रम ऐसे समय में हो रहे हैं जब प्रदेश की राजनीति में जातीय और सामाजिक समीकरणों को लेकर नई बहस छिड़ी हुई है। बीजेपी पहले से ही अपने संगठन और सरकार के जरिए विभिन्न वर्गों को साधने में जुटी है, जबकि विपक्षी दल अपने जनाधार को मजबूत करने के लिए नई रणनीतियां तैयार कर रहे हैं। अब सवाल यह है कि क्या मायावती की अयोध्या रैली बसपा को नई राजनीतिक ऊर्जा दे पाएगी? क्या अखिलेश यादव का ब्राह्मण आउटरीच अभियान सपा को अतिरिक्त राजनीतिक बढ़त दिला सकेगा? इन सवालों के जवाब आने वाले महीनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं।

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