सरकार ने 50% किराया छूट का किया था दावा, अभ्यर्थियों का आरोप- बसों में पूरा किराया वसूला जा रहा।
वायरल वीडियो में युवाओं ने जताई नाराजगी, परीक्षा केंद्र तक आने-जाने की बेहतर व्यवस्था और तत्काल राहत की मांग।
लखनऊ/उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा को लेकर एक बार फिर अभ्यर्थियों की समस्याएं चर्चा का विषय बन गई हैं। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे एक वीडियो में दो युवा अभ्यर्थी दावा कर रहे हैं कि सरकार द्वारा घोषित किराया छूट का लाभ उन्हें नहीं मिल रहा है और उनसे बसों में पूरा किराया लिया जा रहा है।
गौरतलब है कि परीक्षा को देखते हुए यह जानकारी सामने आई थी कि अभ्यर्थियों को रोडवेज बसों में किराए पर विशेष छूट दी जाएगी, ताकि दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले युवाओं को आर्थिक राहत मिल सके। लेकिन अब कुछ अभ्यर्थियों का आरोप है कि जमीनी स्तर पर उन्हें इस सुविधा का लाभ नहीं मिल रहा है। वायरल वीडियो में दिखाई दे रहे युवाओं का कहना है कि परीक्षा देने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है, लेकिन बसों में किसी प्रकार की छूट नहीं दी जा रही है। उनका आरोप है कि उन्हें सामान्य यात्रियों की तरह पूरा किराया देना पड़ रहा है। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर बहस शुरू हो गई है। युवाओं का कहना है कि यदि सरकार ने किसी प्रकार की छूट की घोषणा की है तो उसका लाभ सभी पात्र अभ्यर्थियों तक पहुंचना चाहिए। उनका यह भी कहना है कि परीक्षा के दौरान लाखों अभ्यर्थी एक जिले से दूसरे जिले तक सफर करते हैं, ऐसे में परिवहन व्यवस्था को और बेहतर बनाया जाना चाहिए ताकि छात्रों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
इस मामले को लेकर कई अभ्यर्थियों ने प्रशासन और परिवहन विभाग से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि कहीं स्तर पर निर्देशों का पालन नहीं हो रहा है तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
हालांकि, वायरल वीडियो में किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। वहीं, इस संबंध में परिवहन विभाग या सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने का इंतजार किया जा रहा है।
अब सवाल यह है कि क्या अभ्यर्थियों की शिकायतों पर संज्ञान लिया जाएगा, क्या किराया छूट को लेकर स्थिति स्पष्ट की जाएगी, और क्या परीक्षा देने जा रहे युवाओं को वाकई घोषित सुविधाओं का लाभ मिलेगा? इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
— जर्नलिस्ट मनीष कुमार
0 टिप्पणियाँ