क्या बसपा और सपा के बीच बढ़ रही है नजदीकी या फिर यह महज सामाजिक शिष्टाचार? राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज।
आजमगढ़। पूर्व विधायक एवं विधान परिषद सदस्य रह चुके शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली की एक सोशल मीडिया पोस्ट और कुछ तस्वीरों ने पूर्वांचल की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। गुड्डू जमाली ने अपने फेसबुक पोस्ट में जानकारी दी कि वह मुबारकपुर और निजामाबाद क्षेत्र में विभिन्न सामाजिक एवं पारिवारिक कार्यक्रमों में शामिल हुए। इसी क्रम में उन्होंने निजामाबाद क्षेत्र के चूरीपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में भी भाग लिया।
सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों में गुड्डू जमाली एक ऐसे व्यक्ति के साथ दिखाई दे रहे हैं जिन्हें स्थानीय स्तर पर बहुजन समाज पार्टी का मंडल स्तरीय पदाधिकारी बताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि कार्यक्रम उनके आमंत्रण पर आयोजित हुआ था और उसी कार्यक्रम में गुड्डू जमाली शामिल हुए।
इसके बाद राजनीतिक चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर बसपा के एक प्रमुख पदाधिकारी के घर समाजवादी पार्टी से जुड़े नेता का पहुंचना केवल एक सामाजिक कार्यक्रम में शिरकत है या इसके पीछे कोई राजनीतिक संदेश भी छिपा है?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भारतीय राजनीति में कई बार सामाजिक कार्यक्रम भी बड़े राजनीतिक संकेत दे जाते हैं। खासकर तब, जब तस्वीरों में अलग-अलग राजनीतिक पृष्ठभूमि के नेता एक साथ दिखाई दें। हालांकि अभी तक न तो गुड्डू जमाली की ओर से किसी राजनीतिक बदलाव का संकेत दिया गया है और न ही संबंधित बसपा पदाधिकारी की ओर से किसी नई राजनीतिक भूमिका की चर्चा की पुष्टि हुई है। लेकिन तस्वीरों और पोस्ट के सामने आने के बाद लोगों के बीच कई तरह के सवाल जरूर उठने लगे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या गुड्डू जमाली भविष्य में फिर से बसपा के करीब आ सकते हैं? या फिर यह सिर्फ एक व्यक्तिगत और सामाजिक संबंध का मामला है? वहीं कुछ लोग यह भी पूछ रहे हैं कि क्या बसपा के स्थानीय नेताओं और सपा के नेताओं के बीच कोई नई राजनीतिक समझ विकसित हो रही है?
फिलहाल इन सवालों का कोई आधिकारिक जवाब सामने नहीं आया है। लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों और फेसबुक पोस्ट ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय जरूर पैदा कर दिया है।
अब देखना यह होगा कि यह मुलाकात सिर्फ सामाजिक शिष्टाचार तक सीमित रहती है या आने वाले दिनों में इसके राजनीतिक मायने भी निकलकर सामने आते हैं।
— जर्नलिस्ट मनीष कुमार
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