"केवल इस्तीफा नहीं, जवाबदेही की शुरुआत जरूरी" — सोनम वांगचुक।

18वें दिन भी जारी आमरण अनशन; शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और सरकार की चुप्पी पर उठाए सवाल।
नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर विभिन्न परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता एवं नवप्रवर्तक सोनम वांगचुक का अनशन 18वें दिन भी जारी रहा। लगातार उपवास के कारण उनकी तबीयत बिगड़ने की खबरें सामने आ रही हैं। इस बीच पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता की आवश्यकता पर जोर दिया।
पत्रकारों द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में कि क्या केवल केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से व्यवस्था सुधर जाएगी, सोनम वांगचुक ने कहा कि केवल इस्तीफा ही समाधान नहीं है, लेकिन इससे जवाबदेही की शुरुआत अवश्य होगी। उनका कहना था कि देश में जिम्मेदारी तय करने की परंपरा कमजोर होती जा रही है, जिसका असर संस्थाओं की विश्वसनीयता पर पड़ रहा है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि शिक्षा और भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की गई, तो मेहनत करने वाले युवाओं के साथ अन्याय होगा और अयोग्य लोग महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालेंगे। उनके अनुसार इसका असर भविष्य में समाज और देश के विकास पर भी पड़ सकता है।
वांगचुक ने सरकार से संवाद स्थापित कर शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की। दूसरी ओर, सरकार की ओर से इस संबंध में अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अनशन के 18वें दिन भी सरकार और आंदोलनकारी पक्ष के बीच बातचीत शुरू न होने से समर्थकों में चिंता बढ़ती जा रही है। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार वार्ता का रास्ता अपनाती है या आंदोलन आगे और लंबा खिंचता है।

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