राजकीयकृत उर्दू मध्य विद्यालय नरकट घाट में मनाई गई भारत छोड़ो प्रस्ताव की 84वीं वर्षगांठ।

छात्र-छात्राओं को भारत छोड़ो आंदोलन का इतिहास बताया, देशभक्ति और स्वतंत्रता संग्राम के मूल्यों से कराया अवगत।
पटना। छात्र-छात्राओं में देशभक्ति की भावना विकसित करने के उद्देश्य से गुलजारबाग शैक्षणिक अंचल स्थित राजकीयकृत उर्दू मध्य विद्यालय, नरकट घाट में भारत छोड़ो आंदोलन का प्रस्ताव पारित होने की 84वीं वर्षगांठ मनाई गई। विद्यालय के शिक्षक सूर्य कान्त गुप्ता ने कक्षा-8 की इतिहास पुस्तक 'हमारे अतीत-III' के अध्याय 'राष्ट्रीय आंदोलन का संगठन: 1870 के दशक से 1947 तक' के संदर्भ में विद्यार्थियों को भारत छोड़ो प्रस्ताव और आंदोलन का महत्व समझाया। उन्होंने बताया कि 14 जुलाई 1942 को वर्धा में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की कार्यसमिति की बैठक में भारत छोड़ो प्रस्ताव पारित किया गया तथा महात्मा गांधी को अहिंसक जन आंदोलन का नेतृत्व सौंपने का निर्णय लिया गया। इसके बाद अगस्त 1942 में "करो या मरो" के आह्वान के साथ भारत छोड़ो आंदोलन शुरू हुआ, जिसने अंग्रेजी शासन की जड़ें हिला दीं। उन्होंने यह भी बताया कि "भारत छोड़ो" का नारा समाजवादी ट्रेड यूनियन नेता युसूफ अली मेहर ने दिया था। इस अवसर पर शिक्षिका प्रणया कुमारी ने भी आंदोलन के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के अंत में प्रधानाध्यापक एस. इब्तेशाम हुसैन काशिफ ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में देशभक्ति, राष्ट्रीय चेतना और स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति सम्मान की भावना विकसित करते हैं तथा विद्यालय में इस प्रकार के कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित होते रहने चाहिए।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ