राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में हुई मुलाकात, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास में IFS की भूमिका पर रहा जोर।
नई दिल्ली। भारतीय वन सेवा (IFS) के प्रशिक्षु अधिकारियों ने राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से शिष्टाचार मुलाकात की। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने प्रशिक्षु अधिकारियों को उनके दायित्वों और पर्यावरण संरक्षण में भारतीय वन सेवा की महत्वपूर्ण भूमिका से अवगत कराया।
भारतीय वन सेवा (इंडियन फारेस्ट सर्विस) देश की अखिल भारतीय सेवाओं (AIS) में शामिल है, जिसकी स्थापना वर्ष 1966 में की गई थी। IFS अधिकारियों को देश के जंगलों, वन्यजीवों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी जाती है।
वन सेवा के अधिकारियों को अक्सर 'जंगलों का प्रहरी' कहा जाता है। उनकी भूमिका केवल वनों और वन्यजीवों की सुरक्षा तक सीमित नहीं होती, बल्कि जैव विविधता के संरक्षण, पर्यावरण संतुलन, जलवायु परिवर्तन से निपटने, प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग और मानव जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहता है।
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