आजमगढ़ : अकीदत और सद्भावना के साथ निकला जुलूस-ए-चेहल्लुम, हजारों लोगों ने लिया निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का लाभ।

डॉ. अरशद हुसैन ने बताया कि जुलूस के दौरान अत्यधिक गर्मी और भीड़ को ध्यान में रखते हुए मेडिकल टीम पूरी तरह मुस्तैद रही।
संवाददाता - नासिर हुसैन आज़मगढ़
आज़मगढ़ : जनपद में जुलूस-ए-चेहल्लुम पूरे श्रद्धा, अकीदत और आपसी सद्भावना के साथ निकाला गया। कर्बला के शहीदों की याद में आयोजित इस जुलूस में बड़ी संख्या में अज़ादारों और ज़ायरीनों ने हिस्सा लिया। जुलूस के दौरान पूरे मार्ग में ग़मगीन माहौल के बीच नौहाख्वानी और मातम किया गया, जिससे वातावरण पूरी तरह श्रद्धा और भावना से ओत-प्रोत रहा। विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों ने भी इस आयोजन में सक्रिय सहभागिता निभाते हुए सेवा कार्यों के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
इसी क्रम में अल-मुज्तबा फाउंडेशन ट्रस्ट द्वारा जुलूस के दौरान भव्य निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें लगभग 1200 लोगों ने लाभ उठाया। शिविर में फिज़िशियन, नेत्र रोग विशेषज्ञ और पैथोलॉजी टीम द्वारा शुगर, हीमोग्लोबिन, ब्लड प्रेशर, ऑक्सीजन स्तर, शरीर का तापमान एवं वजन की जांच की गई। साथ ही मरीजों को आवश्यक दवाइयां एवं प्राथमिक उपचार निःशुल्क उपलब्ध कराया गया, जिससे लोगों को काफी राहत मिली।
डॉ. अरशद हुसैन ने बताया कि जुलूस के दौरान अत्यधिक गर्मी और भीड़ को ध्यान में रखते हुए मेडिकल टीम पूरी तरह मुस्तैद रही। डिहाइड्रेशन, चक्कर आना, थकान व अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित लोगों का तत्काल उपचार किया गया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजनों में स्वास्थ्य सेवाएं अत्यंत आवश्यक होती हैं और टीम ने पूरी जिम्मेदारी के साथ अपना दायित्व निभाया।
ट्रस्ट के संस्थापक सैय्यद वसी हैदर रिज़वी ने बताया कि इमाम हुसैन (अ.स.) की शिक्षाओं से प्रेरित होकर हर वर्ष इस प्रकार के सेवा कार्य किए जाते हैं। उनका उद्देश्य मानवता की सेवा करना और जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी ऐसे सामाजिक कार्य निरंतर जारी रहेंगे।
शिविर में डॉ. अरशद हुसैन, डॉ. मुहम्मद कुमैल, डॉ. मुहम्मद अब्बास, डॉ. अली शब्बीर, डॉ. यासूब हैदर, डॉ. कुमैल ज़ैदी, डॉ. अफ़ज़ल अहमद और शकील हैदर सहित अन्य चिकित्सकों ने अपनी सेवाएं प्रदान कीं। वहीं सैय्यद ज़हीर हैदर (एडवोकेट) और सैय्यद तनवीर रिज़वी (आप) समेत कई सामाजिक कार्यकर्ता भी पूरे समय सेवा कार्यों में जुटे रहे और आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कुल मिलाकर यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक रहा, बल्कि इंसानियत, भाईचारे और सामाजिक एकता की एक उत्कृष्ट मिसाल भी प्रस्तुत करता नजर आया।

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