आजमगढ़ : मंदिर प्रबंधन को लेकर विवाद, ट्रस्टियों ने एसपी से की रामेश्वर दास को हटाने की मांग।

राधेश्याम भगवान प्रणामी सेवा ट्रस्ट चेतनपुरी धाम का मामला, पूजा-पाठ और संपत्ति के प्रबंधन को लेकर दोनों पक्षों में मतभेद का दावा।
संवाददाता - राकेश गौतम/धीरज वर्मा 
आजमगढ़। मुबारकपुर थाना क्षेत्र के ग्राम बरडीहा उर्फ गड़ेरुआ स्थित राधेश्याम भगवान प्रणामी सेवा ट्रस्ट चेतनपुरी धाम के मंदिर प्रबंधन और पूजा-पाठ को लेकर विवाद सामने आया है। मंदिर से जुड़े ट्रस्टियों ने पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर रामेश्वर दास को मंदिर से हटाने तथा मंदिर की व्यवस्था सुचारु कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।
ट्रस्टियों के मुताबिक मंदिर निजानन्द सम्प्रदाय का पुराना प्रणामी मंदिर है। शिकायत में दावा किया गया है कि मंदिर के महंथ चेतनदास ने 1 मई 2012 को पंजीकृत वसीयत के माध्यम से मंदिर के प्रबंधन संबंधी अधिकार स्वामी राजदास जी महाराज के पक्ष में किए थे। महंथ चेतनदास के 21 जून 2014 को धाम गमन के बाद मंदिर एवं उससे जुड़ी चल-अचल संपत्तियों का प्रबंधन स्वामी राजदास जी महाराज द्वारा किए जाने की बात कही गई है। प्रार्थना पत्र के अनुसार सम्प्रदाय के अनुयायियों को शामिल करते हुए मंदिर की सेवा-पूजा, देखरेख और प्रबंधन के लिए 24 जुलाई 2026 को एक ट्रस्ट का गठन किया गया, जिसका पंजीकरण उपनिबंधक कार्यालय आजमगढ़ में पंजीकरण संख्या 80, वर्ष 2026 के रूप में कराया गया।
पुजारी से बदसलूकी का लगाया आरोप-
ट्रस्टियों का आरोप है कि मंदिर में लंबे समय से सुदामा पुजारी सेवा-पूजा कर रहे थे। इसी बीच रामेश्वर दास अपने पुत्र के साथ 4 अगस्त 2026 को मंदिर पहुंचे। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उन्होंने पुजारी सुदामा के साथ कथित रूप से बदसलूकी की और उन्हें मंदिर से चले जाने के लिए कहा। सूचना मिलने पर ट्रस्ट से जुड़े लोग मौके पर पहुंचे और मामले को समझाने का प्रयास किया। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बातचीत के दौरान रामेश्वर दास ने मंदिर पर अपना अधिकार बताते हुए स्वयं को महंथ बताया और नवगठित ट्रस्ट को स्वीकार करने से इनकार किया। ट्रस्टियों के अनुसार मंदिर में अन्य लोगों के प्रवेश और सुदामा द्वारा पूजा किए जाने का भी विरोध किया गया।
मंदिर की संपत्ति को लेकर भी लगाए आरोप-
ट्रस्टियों ने मंदिर की कृषि भूमि और पेड़ों को लेकर भी आरोप लगाए हैं। शिकायत में दावा किया गया है कि मंदिर के खेतों में कई वर्षों से फसल नहीं उगाने दी गई तथा मंदिर परिसर अथवा संपत्ति में मौजूद पेड़ों को कथित रूप से कटवाकर बेचने का काम किया गया। इसके अलावा कुछ ग्रामीणों और महिलाओं के साथ कथित अभद्र व्यवहार किए जाने के भी आरोप लगाए गए हैं। ट्रस्टियों ने यह भी आरोप लगाया है कि उन्हें फर्जी मुकदमों में फंसाने तथा मंदिर की संपत्ति हड़पने संबंधी बयान दिए जा रहे हैं। हालांकि शिकायत में लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
जांच के बाद स्थिति होगी स्पष्ट-
12 अगस्त 2026 को दिए गए प्रार्थना पत्र में ट्रस्टियों ने पुलिस अधीक्षक से मामले में हस्तक्षेप कर मंदिर की व्यवस्था बनाए रखने और रामेश्वर दास को हटाने के लिए आवश्यक निर्देश देने की मांग की है।
फिलहाल मामला शिकायतकर्ताओं द्वारा लगाए गए आरोपों और मंदिर के प्रबंधन संबंधी दावों पर आधारित है। रामेश्वर दास या उनके पक्ष की प्रतिक्रिया इस प्रार्थना पत्र में उपलब्ध नहीं है। मंदिर के प्रबंधन और संपत्ति पर वास्तविक कानूनी अधिकार संबंधित दस्तावेजों एवं अभिलेखों की जांच तथा सक्षम प्राधिकारी के निर्णय के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

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