आजमगढ़ : जिले में बिना पर्याप्त अग्नि सुरक्षा के संचालित हो रहे कोचिंग सेंटर, छात्रों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल।

ब्रह्मस्थान, सिविल लाइन, करतालपुर, भंवरनाथ, कंधरापुर, सिधारी और बेलईसा समेत कई इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवाल, छोटे कमरों में बड़ी संख्या में छात्रों को बैठाने का आरोप; अप्रिय घटना हुई तो जिम्मेदारी किसकी—संचालक या प्रशासन?
आजमगढ़। जिले में शिक्षा के नाम पर जगह-जगह संचालित हो रहे कोचिंग सेंटरों में छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ब्रह्मस्थान, सिविल लाइन, करतालपुर, भंवरनाथ, कंधरापुर, सिधारी, बेलईसा सहित जिले के कई प्रमुख क्षेत्रों में संचालित कुछ कोचिंग सेंटरों में अग्निशमन यंत्र, आपातकालीन निकास और अन्य जरूरी अग्नि सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं की मौजूदगी वाले इन संस्थानों में यदि सुरक्षा मानकों की अनदेखी हो रही है तो यह किसी बड़े हादसे को न्योता देने जैसा हो सकता है।
स्थानीय लोगों और अभिभावकों का कहना है कि जिले के कई इलाकों में छोटे-छोटे कमरों अथवा सीमित जगहों में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को बैठाकर कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। ऐसे स्थानों पर आने-जाने के रास्ते सीमित होने के कारण किसी आपात स्थिति में विद्यार्थियों को सुरक्षित बाहर निकालना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों को पढ़ाई के लिए कोचिंग भेजते समय उनकी सुरक्षा को लेकर भी उतनी ही गंभीरता होनी चाहिए जितनी पढ़ाई को लेकर होती है।

जांच के दायरे में आएं जिले के सभी कोचिंग सेंटर:--
अभिभावकों की मांग है कि प्रशासन जिले के सभी प्रमुख क्षेत्रों में संचालित कोचिंग सेंटरों का व्यापक निरीक्षण कराए। जांच के दौरान यह देखा जाए कि संबंधित संस्थानों में अग्निशमन यंत्र उपलब्ध हैं या नहीं, वे चालू हालत में हैं या नहीं, आपातकालीन स्थिति में बाहर निकलने के पर्याप्त रास्ते हैं या नहीं और छात्रों की संख्या के अनुपात में परिसर की व्यवस्था पर्याप्त है या नहीं।
सवाल यह भी है कि यदि किसी कोचिंग सेंटर में निर्धारित सुरक्षा व्यवस्था नहीं है तो उसे संचालित करने की अनुमति कैसे मिल रही है। अभिभावकों का कहना है कि हादसा होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय प्रशासन को पहले ही ऐसे संस्थानों की जांच कर कमियों को दूर कराना चाहिए।

बच्चों की सुरक्षा से समझौता क्यों?
कोचिंग सेंटरों में पढ़ने वाले अधिकांश विद्यार्थी कई घंटे इन परिसरों में बिताते हैं। ऐसे में भवन की सुरक्षा, बिजली की वायरिंग, प्रवेश और निकास मार्ग, अग्निशमन उपकरण तथा आपातकालीन व्यवस्था जैसे विषय बेहद महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ जगहों पर व्यावसायिक गतिविधियों के लिए सीमित स्थान का इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि वहां छात्रों की संख्या काफी अधिक रहती है। यदि किसी कारण से आग, शॉर्ट सर्किट या अन्य आपात स्थिति उत्पन्न होती है तो भीड़ को सुरक्षित बाहर निकालना मुश्किल हो सकता है।

लखनऊ की घटना से सबक लेने की जरूरत:-
अभिभावकों ने पूर्व में लखनऊ में हुई कोचिंग सेंटर की आग की घटना का हवाला देते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं से सबक लेना जरूरी है। उनका कहना है कि किसी घटना के बाद अफसोस जताने और जांच कराने से बेहतर है कि उससे पहले सुरक्षा मानकों की जांच कर आवश्यक कदम उठाए जाएं।
अभिभावकों का कहना है कि कोचिंग सेंटर संचालकों की जिम्मेदारी तय करने के साथ-साथ संबंधित विभागों को भी नियमित निरीक्षण करना चाहिए, ताकि नियमों का पालन सुनिश्चित हो सके।

अगर हादसा हुआ तो जिम्मेदारी किसकी होगी?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि किसी कोचिंग सेंटर में सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण कोई अप्रिय घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी?
क्या केवल कोचिंग सेंटर संचालक को जिम्मेदार माना जाएगा, या उन जिम्मेदार विभागों की भी जवाबदेही तय होगी जिनका काम ऐसे संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी और नियमों के पालन को सुनिश्चित करना है?
अभिभावकों का कहना है कि हादसे का इंतजार करने के बजाय प्रशासन को अभी से कार्रवाई करनी चाहिए। जिले के सभी कोचिंग सेंटरों की जांच कराकर जहां भी अग्नि सुरक्षा व्यवस्था में कमी मिले, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाए और आवश्यक सुरक्षा इंतजाम पूरे कराए जाएं।

अभिभावकों ने उठाई ठोस कार्रवाई की मांग:-
अभिभावकों ने जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि ब्रह्मस्थान से लेकर सिविल लाइन, करतालपुर, भंवरनाथ, कंधरापुर, सिधारी, बेलईसा और जिले के अन्य क्षेत्रों में संचालित कोचिंग सेंटरों का अभियान चलाकर निरीक्षण कराया जाए।
उनका कहना है कि बच्चों की सुरक्षा किसी भी स्थिति में लापरवाही का विषय नहीं हो सकती। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जिन स्थानों पर बड़ी संख्या में विद्यार्थी पढ़ रहे हैं, वहां आवश्यक सुरक्षा मानकों का पालन हो।
अब देखना यह होगा कि जिले में उठ रहे इन सवालों के बाद प्रशासन और संबंधित विभाग कोचिंग सेंटरों की सुरक्षा व्यवस्था की जांच के लिए कोई व्यापक अभियान चलाते हैं या फिर किसी अप्रिय घटना के बाद ही जिम्मेदारी तय करने की कवायद शुरू होगी।

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