आरक्षण विरोधी प्रदर्शन पर मायावती का कड़ा प्रहार, सरकारों से बोलीं- ऐसे तत्वों को संरक्षण न दें।

जंतर-मंतर के प्रदर्शन को लेकर बसपा सुप्रीमो ने उठाए सवाल, आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग को बताया सामाजिक न्याय की मूल भावना से अलग।
लखनऊ। दिल्ली के जंतर-मंतर पर एससी, एसटी और ओबीसी आरक्षण के विरोध में हुए प्रदर्शन को लेकर बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से अपील की कि आरक्षण विरोधी गतिविधियों को किसी भी स्तर पर संरक्षण नहीं मिलना चाहिए। मायावती ने कहा कि आरक्षण देश में सामाजिक बराबरी और प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की संवैधानिक व्यवस्था है, इसलिए इस विषय पर राजनीतिक लाभ के लिए माहौल खराब करने से बचना चाहिए।https://www.instagram.com/reel/DcX2pDlRoRp/?igsi=MXZsZ2R4bzFkczVkZw==
मायावती ने कहा कि लंबे समय तक जातिगत भेदभाव और सामाजिक असमानता झेलने वाले वर्गों को संविधान ने आरक्षण के माध्यम से आगे बढ़ने का अवसर दिया। उनके मुताबिक, इस व्यवस्था को केवल आर्थिक स्थिति के नजरिए से देखना ऐतिहासिक सामाजिक परिस्थितियों की अनदेखी होगी।
आर्थिक आधार की मांग पर मायावती ने सरकारों को घेरा-
बसपा सुप्रीमो ने आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की मदद के लिए सरकारों के पास गरीबी उन्मूलन और कल्याणकारी योजनाओं का रास्ता पहले से मौजूद है। जरूरत इस बात की है कि इन योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक ईमानदारी से पहुंचे।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक कमियों के कारण बड़ी संख्या में जरूरतमंद लोग अपेक्षित लाभ से वंचित रह जाते हैं। मायावती ने आर्थिक आधार पर मौजूदा आरक्षण व्यवस्था के लाभ को लेकर भी सवाल खड़े किए।
सरकारी व्यवस्था पर लगाए गंभीर आरोप-
मायावती ने कहा कि संविधान में आरक्षण का प्रावधान होने के बावजूद उसका अपेक्षित लाभ सभी पात्र लोगों तक नहीं पहुंच पाया है। उन्होंने सरकारी व्यवस्था में मौजूद भ्रष्टाचार और जातिगत भेदभाव को इसके लिए जिम्मेदार बताया। उनके अनुसार, इसी कारण एससी, एसटी और ओबीसी समाज के लोगों को आज भी गरीबी, भेदभाव और सामाजिक उत्पीड़न जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
राहुल गांधी को भी निशाने पर लिया-
मायावती ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के धरने को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जिस दिन राहुल गांधी एक अन्य मामले को लेकर धरने पर बैठे थे, उसी दौरान जंतर-मंतर पर आरक्षण के खिलाफ प्रदर्शन हो रहा था। मायावती ने सवाल किया कि कांग्रेस के किसी नेता ने वहां पहुंचकर प्रदर्शनकारियों से आरक्षण व्यवस्था के संवैधानिक महत्व पर बातचीत क्यों नहीं की।
उन्होंने इसे कांग्रेस की आरक्षण को लेकर कथित अस्पष्टता से जोड़ते हुए सवाल उठाया और कहा कि सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक दलों को स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए।
मायावती ने अंत में राजनीतिक दलों और आम लोगों से आरक्षण जैसे संवेदनशील विषय पर सस्ती राजनीति से बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि सामाजिक बराबरी और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक टकराव का माध्यम बनाने के बजाय गंभीरता से समझने की जरूरत है।

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