31 अगस्त को लखनऊ में बसपा की बड़ी बैठक, संगठन की मजबूती और 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर होगा मंथन।
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर गतिविधियां तेज होती दिखाई दे रही हैं। पार्टी ने सबसे पहले अपने पूर्व राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर रणधीर बेनीवाल को दोबारा पार्टी में शामिल कर लिया है। उनकी वापसी को संगठन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसके बाद अब 31 अगस्त को लखनऊ में होने वाली बसपा की बड़ी बैठक पर राजनीतिक गलियारों की निगाहें टिक गई हैं।
बसपा की ओर से जारी मीडिया निमंत्रण के अनुसार, पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती 31 अगस्त को लखनऊ स्थित बसपा के प्रदेश कार्यालय में पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों और सभी 75 जिलों के जिलाध्यक्षों की विशेष बैठक को संबोधित करेंगी। बैठक सुबह 11 बजे से प्रस्तावित है।
बैठक में पार्टी संगठन की जमीनी स्थिति, आर्थिक मजबूती और जनाधार को सर्वसमाज में बढ़ाने के लिए पूर्व में दिए गए दिशा-निर्देशों की प्रगति की समीक्षा की जाएगी। इसके साथ ही आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों और पार्टी प्रत्याशियों के चयन को लेकर भी मंथन होने की बात कही गई है।
रणधीर बेनीवाल की वापसी और उसके तुरंत बाद होने वाली यह बैठक बसपा की रणनीति को लेकर कई सवाल खड़े कर रही है। राजनीतिक जानकारों की नजर इस बात पर रहेगी कि मायावती संगठन को लेकर कौन-से नए निर्देश देती हैं और चुनावी मैदान के लिए पार्टी की रणनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है।
बसपा की सक्रियता से सपा और भाजपा के राजनीतिक समीकरणों पर भी असर पड़ने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश समेत विभिन्न क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करने की कोशिशें आने वाले समय में विपक्षी दलों के लिए चुनौती बन सकती हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 31 अगस्त की बैठक से मायावती कौन-सा बड़ा संदेश देती हैं और 2027 के चुनाव को लेकर बसपा की रणनीति क्या होती है? बैठक के बाद सामने आने वाले फैसले प्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर सकते हैं।
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