कहा— चार दिन के संक्षिप्त सत्र में जनहित के मुद्दों पर गंभीर चर्चा हो, केवल औपचारिकता बनकर न रह जाए विधानसभा।
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट कर उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र को लेकर कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि 3 अगस्त से शुरू हो रहा विधानसभा का मानसून सत्र कुल चार कार्य दिवस का है, जबकि 4 अगस्त को राज्य सरकार अनुपूरक बजट पेश करेगी।https://www.instagram.com/reel/DbkHVy4xit_/?igsh=OWNmODNpNGM5cmZo मायावती ने अपने पोस्ट में कहा कि सत्र भले ही अल्पकालीन हो, लेकिन जनता की अपेक्षा है कि यह संसद के मौजूदा सत्र की तरह आरोप-प्रत्यारोप और हंगामे की भेंट न चढ़े। उन्होंने कहा कि सदन में जनहित, जनकल्याण और प्रदेश की ज्वलंत समस्याओं पर गंभीर एवं सार्थक चर्चा होनी चाहिए।
बसपा प्रमुख ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विधायिका की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। अफसरशाही को संविधान के प्रति जवाबदेह बनाए रखने और जनता के हितों की रक्षा के लिए विधायिका का संवैधानिक प्रभाव कमजोर नहीं होना चाहिए।
उन्होंने लगातार कम होते विधानसभा सत्रों की अवधि पर भी चिंता जताते हुए सवाल किया कि क्या इतना संक्षिप्त सत्र अपने वास्तविक उद्देश्य को पूरा कर पाएगा या फिर केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगा? उन्होंने सरकार और विपक्ष दोनों से लोकतांत्रिक मर्यादा का पालन करते हुए गंभीर संसदीय आचरण अपनाने की अपील की।
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