बड़ी खबर : ईशान आनंद की नई जिम्मेदारी पर विश्वनाथ पाल का बयान, भाजपा और सपा पर भी साधा निशाना!

9 अक्टूबर को लखनऊ में कांशीराम की पुण्यतिथि पर कार्यकर्ताओं से पहुंचने की अपील, बोले—पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी रहती है बसपा…!
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी में ईशान आनंद को राष्ट्रीय संयोजक बनाए जाने के बाद संगठन और आगामी रणनीति को लेकर चर्चाएं तेज हैं। 23 सितंबर को मायावती की अध्यक्षता में हुई बैठक में ईशान आनंद को राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके बाद उत्तर प्रदेश बसपा अध्यक्ष विश्वनाथ पाल ने पार्टी की संगठनात्मक तैयारियों, कार्यकर्ताओं की भूमिका और प्रदेश के राजनीतिक हालात को लेकर अपनी बात रखी।
विश्वनाथ पाल ने बसपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों से 9 अक्टूबर 2026 को लखनऊ पहुंचने की अपील की। उन्होंने कहा कि मान्यवर कांशीराम की पुण्यतिथि पर कार्यकर्ता राजधानी में जुटें और संगठन को मजबूत करने का संकल्प लें। उन्होंने कार्यकर्ताओं से मायावती को उत्तर प्रदेश में पांचवीं बार मुख्यमंत्री बनाने के लक्ष्य के लिए मेहनत करने की अपील की।
ईशान की उम्र पर उठे सवालों का जवाब-
ईशान आनंद को कम उम्र में राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी दिए जाने के सवाल पर विश्वनाथ पाल ने कहा कि उन्हें विधायक या सांसद नहीं बनाया गया है और न ही कोई चुनावी टिकट दिया गया है। उनके अनुसार राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी संगठन को समझने और पार्टी के मिशन के लिए काम करने का अवसर है।
उन्होंने मायावती के पुराने फैसलों का उल्लेख करते हुए राजाराम, जयप्रकाश सिंह और रामजी गौतम जैसे नेताओं का उदाहरण दिया। उनका कहना था कि इन नेताओं को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलीं और वे मायावती के परिवार से नहीं थे।
पीड़ित परिवारों तक पहुंचने का दावा-
विश्वनाथ पाल ने कहा कि प्रदेश में जहां भी किसी समाज की बहन-बेटी के साथ अत्याचार की घटना सामने आती है, वहां मायावती के निर्देश पर वह स्वयं पहुंचकर पीड़ित परिवार से मिलने का प्रयास करते हैं। उन्होंने कहा कि मामले की पूरी जानकारी और रिपोर्ट पार्टी प्रमुख मायावती को दी जाती है। उनके मुताबिक पार्टी यह भी देखती है कि पीड़ित परिवार और कार्यकर्ताओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
भाजपा पर लगाए आरोप-
प्रदेश अध्यक्ष ने भाजपा पर निशाना साधते हुए प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उनके अनुसार प्रदेश में “जंगल राज” जैसी स्थिति है। उन्होंने बेरोजगारी और बढ़ते अपराध का मुद्दा उठाते हुए सरकारी तंत्र पर भी सवाल खड़े किए। ये विश्वनाथ पाल द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं।
सपा के PDA पर भी निशाना-
विश्वनाथ पाल ने समाजवादी पार्टी पर भी हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा समय-समय पर PDA का मतलब बदलती रहती है। उनका कहना था कि सत्ता में रहते हुए सपा बहुजन महापुरुषों को वह महत्व नहीं देती, जबकि सत्ता से बाहर रहने पर दलित समाज के बीच समर्थन हासिल करने के लिए बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर और मान्यवर कांशीराम का नाम लिया जाता है। यह भी विश्वनाथ पाल की राजनीतिक आलोचना है।
ईशान आनंद की नई जिम्मेदारी और विश्वनाथ पाल समेत वरिष्ठ नेताओं की सक्रियता के बीच बसपा अब संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने पर जोर दे रही है। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी की आगामी गतिविधियों और 9 अक्टूबर के कार्यक्रम पर राजनीतिक नजरें रहेंगी।

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