PDA की राजनीति के बीच मंच पर सम्मान नहीं मिलने का आरोप, अनुराधा कठेरिया ने अखिलेश यादव से कार्रवाई की मांग की…
उरई, जालौन। समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल के जालौन दौरे के दौरान आयोजित PDA सम्मेलन में उस समय माहौल असहज हो गया, जब दलित समाज से आने वाली पार्टी की महिला नेत्री अनुराधा कठेरिया ने मंच पर उचित स्थान नहीं दिए जाने को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। कार्यक्रम के दौरान सामने आए इस विरोध ने सपा के भीतर सामाजिक प्रतिनिधित्व, सम्मान और राजनीतिक भागीदारी को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।
अनुराधा कठेरिया के मुताबिक वह लंबे समय से पार्टी और समाज के बीच सक्रिय रहकर लोगों के सुख-दुख में भागीदारी निभाती रही हैं। आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर उन्होंने पार्टी से अपनी दावेदारी भी पेश की है। उनका आरोप है कि सक्रियता के बावजूद कार्यक्रम में उन्हें मंच पर उचित स्थान नहीं दिया गया। उन्होंने इसे दलित समाज और खासकर दलित महिलाओं के राजनीतिक सम्मान एवं प्रतिनिधित्व से जोड़ते हुए गंभीर सवाल उठाए।
महिला नेत्री ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से पूरे मामले को गंभीरता से लेने की मांग की है। उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों की भूमिका की समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई किए जाने की भी अपील की।
PDA की राजनीति के बीच उठे प्रतिनिधित्व के सवाल-
समाजवादी पार्टी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों की राजनीतिक भागीदारी को लेकर PDA की रणनीति को लगातार प्रमुखता देती रही है। ऐसे में पार्टी के ही एक कार्यक्रम में दलित महिला नेत्री की ओर से सम्मान और प्रतिनिधित्व को लेकर विरोध सामने आने से राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
हालांकि, कार्यक्रम में सामने आए आरोपों और पूरे घटनाक्रम को लेकर पार्टी नेतृत्व या प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
संगठन के लिए चुनौती बन सकती है अंदरूनी नाराजगी-
आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए सपा संगठन को मजबूत करने में जुटी है। ऐसे में नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच सम्मान, प्रतिनिधित्व और टिकट की दावेदारी जैसे मुद्दों पर सामने आने वाली नाराजगी पार्टी के लिए चुनौती बन सकती है।
अब राजनीतिक नजर इस बात पर है कि सपा नेतृत्व अनुराधा कठेरिया की नाराजगी को किस तरह दूर करता है और संगठन में सामाजिक प्रतिनिधित्व को लेकर उठ रहे सवालों का क्या समाधान निकालता है। PDA के जरिए व्यापक सामाजिक भागीदारी का संदेश देने वाली सपा के लिए अपने ही नेताओं और कार्यकर्ताओं के असंतोष को संभालना आने वाले समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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