कंचना यादव ने कहा कि बहन मायावती सामाजिक न्याय की राजनीति की मिसाल हैं। उनका नेतृत्व सत्ता की कृपा पर नहीं, बल्कि जनता के भरोसे और लंबे संघर्ष पर टिका है।
नई दिल्ली : देश की राजनीति में नेतृत्व को लेकर जब भी चर्चा होती है, तो अक्सर “पर्ची सिस्टम” का जिक्र सामने आता है। कहीं किसी को अचानक हटा दिया जाता है, तो कहीं किसी नए चेहरे को सत्ता की कुर्सी पर बैठा दिया जाता है। इसी संदर्भ में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की प्रवक्ता कंचना यादव का बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। कंचना यादव ने कहा कि “मोदी जी कहीं पर्ची से वसुंधरा को हटा देते हैं तो कहीं पर्ची से रेखा गुप्ता को बना देते हैं, मगर बहन जी बनाई या हटाई नहीं जा सकतीं।” उनका कहना है कि बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष बहन मायावती किसी सत्ता की कृपा या पर्ची की देन नहीं हैं, बल्कि वे संघर्षों, आंदोलनों और सामाजिक न्याय की लड़ाइयों से निकली हुई नेता हैं।
उन्होंने आगे कहा कि बहन जी ने दलित, पिछड़े और वंचित समाज को न सिर्फ आवाज दी, बल्कि उन्हें सत्ता के केंद्र तक पहुंचाने का काम किया। जब राजनीति में अवसर और पद अक्सर चंद लोगों की मर्जी से तय होते हैं, तब मायावती जैसी नेता एक मिसाल बनकर सामने आती हैं, जिन्हें न बनाया जा सकता है और न ही हटाया जा सकता है। राजद प्रवक्ता के अनुसार, बहन मायावती आज भी करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा हैं। उनका नेतृत्व किसी व्यक्ति विशेष पर नहीं, बल्कि सामाजिक आंदोलन और विचारधारा पर टिका है। यही कारण है कि तमाम उतार-चढ़ाव के बावजूद उनकी राजनीतिक मौजूदगी बनी हुई है और आगे भी बनी रहेगी।
कंचना यादव ने यह भी कहा कि भारतीय राजनीति को “पर्ची संस्कृति” से ऊपर उठकर संघर्ष, विचार और जनता के भरोसे से बने नेतृत्व को पहचानने की जरूरत है। बहन मायावती इसी राजनीति की प्रतीक हैं, जो आज भी एक मिसाल के रूप में देखी जाती हैं।
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