नए विधेयक को बताया मनरेगा कानून की हत्या, गरीब-मजदूर विरोधी करार!
विधेयक वापस न लेने पर देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी!
संवाददाता-अबुल कैश निज़ामबाद
आजमगढ़। मनरेगा कानून में केंद्र सरकार द्वारा किए जा रहे संशोधन के विरोध में वामपंथी पार्टियों के राष्ट्रीय अभियान के तहत जनपद में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा), सीपीएम और माले के कार्यकर्ताओं ने संयुक्त रूप से जोरदार प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने शहीद कुंवर सिंह पार्क से जुलूस निकालते हुए पूरे कलेक्ट्रेट परिसर का भ्रमण किया और राष्ट्रपति को संबोधित सात सूत्रीय मांगपत्र जिलाधिकारी के माध्यम से सौंपा।
प्रदर्शन के दौरान वामपंथी नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार महात्मा गांधी के नाम पर चल रही ऐतिहासिक योजना मनरेगा से उनका नाम हटाकर उसका अपमान कर रही है। उन्होंने कहा कि “विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन” विधेयक लाकर बीजेपी सरकार मनरेगा कानून को खत्म करने की साजिश कर रही है। पहले जहां मनरेगा में 90 प्रतिशत खर्च केंद्र और 10 प्रतिशत राज्य सरकारें वहन करती थीं, वहीं अब राज्यों पर 40 प्रतिशत भार डाल दिया गया है, जिससे कर्ज में डूबी राज्य सरकारों के लिए योजना चलाना मुश्किल हो जाएगा।
वामपंथी नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार गरीबों और खेत मजदूरों से आजीविका के साधन छीनकर उन्हें गुलामी की ओर धकेलना चाहती है। मांगपत्र में नया विधेयक वापस लेने, मनरेगा को पूर्ववत लागू रखने, खेत मजदूरों को साल में 200 दिन काम की गारंटी देने, वृद्धावस्था में 10 हजार रुपये मासिक पेंशन तथा मजदूरों की आर्थिक-सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार इस विधेयक को वापस नहीं लेती है तो भूमि अधिग्रहण और किसान आंदोलन की तरह देशव्यापी आंदोलन छेड़ा जाएगा। इस अवसर पर भाकपा जिला सचिव जितेंद्र हरि पाण्डेय, सीपीएम जिलामंत्री रामबृक्ष, माले के वरिष्ठ नेता वसंत लाल सहित अनेक किसान व मजदूर नेता और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
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