चंद्रशेखर आज़ाद से भिड़ने चले थे अनिल मिश्रा, दो लाठी पड़ते ही याद आई नानी, ढीले पड़े तेवर!

लाठी पड़ते ही नानी याद आ गई।” हालात यह हो गए कि टकराव की बातें करने वाले अनिल मिश्रा पीछे हटने में ही भलाई समझने लगे।
मध्यप्रदेश : राजनीतिक बयानबाज़ी और शक्ति प्रदर्शन के दौर में आज एक अजीबो-गरीब नज़ारा देखने को मिला। खुद को बड़ा नेता साबित करने चले अनिल मिश्रा, आज़ाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सांसद चंद्रशेखर आज़ाद से भिड़ने के इरादे से मैदान में उतरे, लेकिन हालात ने ऐसा पलटा खाया कि दो लाठी पड़ते ही उनके तेवर पूरी तरह ढीले पड़ गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अनिल मिश्रा जोश-जोश में तीखी बयानबाज़ी करते हुए आगे बढ़े ही थे कि पुलिस के हल्के बल प्रयोग ने उनकी सारी हेकड़ी निकाल दी। दो लाठी पड़ते ही उनके चेहरे का रंग उड़ गया और वही अनिल मिश्रा, जो कुछ देर पहले तक आक्रामक तेवर दिखा रहे थे, अचानक संयम और शांति की दुहाई देने लगे। मौके पर मौजूद लोगों ने तंज कसते हुए कहा कि “लाठी पड़ते ही नानी याद आ गई।” हालात यह हो गए कि टकराव की बातें करने वाले अनिल मिश्रा पीछे हटने में ही भलाई समझने लगे।
वहीं दूसरी ओर चंद्रशेखर आज़ाद पूरी तरह शांत और संयमित नज़र आए। उनके समर्थकों ने कहा कि आज़ाद का रास्ता संघर्ष और संविधान का है, न कि दिखावटी ताकत और खोखले बयानबाज़ी का। घटना के बाद राजनीतिक गलियारों में इस पूरे प्रकरण की खूब चर्चा हो रही है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर कैमरों के सामने शेर बनने वाले नेता ज़मीनी हकीकत आते ही क्यों घुटनों के बल आ जाते हैं।

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