कांशीराम की पुण्यतिथि पर उमड़ी भीड़ से मिला संदेश, बसपा अभी भी सियासी ताकत!
कांग्रेस-सपा समेत विपक्षी दलों को मिला संकेत, गठबंधन की बढ़ी सुगबुगाहट!
नई दिल्ली : 2025 के जाते-जाते बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती ने एक बार फिर अपनी राजनीतिक ताकत का एहसास करा दिया। कांशीराम की पुण्यतिथि पर नीली टोपियों और झंडों के साथ लाखों कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने यह साफ संदेश दे दिया कि बसपा अभी खत्म नहीं हुई है। इसी क्रम में मायावती के उस बयान ने पार्टी में नई ऊर्जा भर दी है, जिसमें उन्होंने कहा कि 2027 में सरकार बनाने के लिए वह अपनी पूरी ताकत झोंक देंगी और कार्यकर्ताओं से जमीनी स्तर पर सक्रिय होकर काम करने का आह्वान किया। इसके बाद से प्रदेश भर में बसपा के नेता, पदाधिकारी और कार्यकर्ता संगठन को मजबूत करने में जुटे नजर आ रहे हैं।
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा तेज हो गई है कि जिस कांग्रेस ने कभी बसपा को कमजोर और भाजपा की ‘बी-टीम’ बताया था, वही आज बसपा से गठबंधन कर चुनाव लड़ने की इच्छा जता रही है। सपा और कांग्रेस सहित तमाम विपक्षी दलों को यह संकेत मिल चुका है कि बसपा फिर से सक्रिय होकर राजनीतिक मैदान में उतरने को तैयार है। हालांकि बड़ा सवाल यह है कि क्या यह जोश और भीड़ 2026 तक संगठित ताकत और ठोस चुनावी रणनीति में बदलेगी या नहीं। संगठन की जमीनी कमजोरियां, युवा वोटरों से दूरी और पिछली चुनावी हार के बीच 2026 बसपा के लिए निर्णायक साल माना जा रहा है, जहां से तय होगा कि मायावती की यह सक्रियता 2027 में सत्ता की मजबूत चुनौती बन पाएगी या नहीं।
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