जयपुर : राजस्थान के बाड़मेर और आसपास के सीमावर्ती इलाकों में कभी जीयाराम नाम का शख्स ऐसा खौफ बनकर उभरा, जिसे लोग आज भी ‘कुंवारे जंवाई राजा’ के नाम से याद करते हैं। रिश्तों की पवित्रता और सामाजिक भरोसे का फायदा उठाकर उसने करीब 55 बार सुहागरात का ढोंग रचते हुए अपराध को अंजाम दिया।
बिजली की कमी और घूंघट प्रथा के दौर में वह नई-नवेली दुल्हन के मायके में खुद को दामाद बताकर दाखिल होता, रात भर पति बनकर रहता और सुबह होते ही घर से गहने-नकदी समेटकर गायब हो जाता। बदनामी के डर से कई परिवारों ने शिकायत तक दर्ज नहीं कराई, जिससे उसका दुस्साहस और बढ़ता गया।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक जीयाराम एक शातिर हिस्ट्रीशीटर था, जिसके खिलाफ पहला मुकदमा 1988 में दर्ज हुआ और चोरी-छेड़छाड़ समेत करीब 17 आपराधिक मामले सामने आए। उसने 1990 से 1996 के बीच सिणधरी, समदड़ी और धोरीमन्ना क्षेत्रों में आतंक मचाया। कई बार जेल जाने के बावजूद वह दोबारा अपराध की दुनिया में लौटता रहा। अंततः वर्ष 2016 में गंभीर बीमारी के चलते उसकी मौत हो गई, लेकिन उसका डर आज भी गांवों की कहानियों में जिंदा है। यह मामला समाज के लिए चेतावनी है कि परंपराओं और हालातों का गलत फायदा उठाने वाले अपराधी किस तरह मानवता को शर्मसार कर सकते हैं।
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