टीबी उन्मूलन को लेकर आजमगढ़ में जागरूकता कार्यक्रम, 2027 तक टीबी मुक्त भारत का संकल्प दोहराया।

2027 तक देश को टीबी मुक्त बनाने के लक्ष्य को लेकर आजमगढ़ में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में स्वास्थ्य अधिकारियों ने टीबी के खिलाफ जन आंदोलन छेड़ने का आह्वान किया।
संवाददाता-धीरज वर्मा चौक आजमगढ़ 
आजमगढ़। टीबी जैसी घातक बीमारी को जड़ से समाप्त करने के लिए सभी को एकजुट होकर जन आंदोलन के रूप में कार्य करना होगा। यह बात मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एन. आर. वर्मा ने बुधवार को एएनएम ट्रेनिंग सेंटर, आजमगढ़ के सभागार में आयोजित टीबी जागरूकता कार्यक्रम के दौरान कही। कार्यक्रम का आयोजन 28 जनवरी 2026 को किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एन. आर. वर्मा, जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. वाई. प्रसाद, उप जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. बी. पी. सिंह तथा वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. बी. के. पटेल (एसएमओ, पीजीआई आजमगढ़) द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एन. आर. वर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2027 तक देश को टीबी मुक्त बनाने का संकल्प लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिया गया नारा “टीबी हारेगा, देश जीतेगा” तभी सफल होगा, जब हम सभी मिलकर धरातल पर योजनाबद्ध तरीके से काम करें। उन्होंने कहा कि कोरोना की तर्ज पर टीबी प्रभावित क्षेत्रों की पहचान कर वहां जागरूकता बढ़ानी होगी। ईंट-भट्टों, मजदूर बस्तियों और ग्रामीण इलाकों पर विशेष फोकस किया जाना जरूरी है, ताकि कोई भी टीबी मरीज इलाज से वंचित न रहे।
उप जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. बी. पी. सिंह ने ग्रामीण चिकित्सकों को संबोधित करते हुए कहा कि टीबी के खिलाफ लड़ाई को जन आंदोलन बनाना होगा। तभी 2027 तक टीबी मुक्त भारत के सपने को साकार किया जा सकेगा। उन्होंने सभी से सहयोग और सक्रिय भागीदारी की अपील की। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. वाई. प्रसाद ने बताया कि प्रदेश में टीबी उन्मूलन के लिए व्यापक स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। सरकार टीबी को लेकर पूरी तरह गंभीर है। यदि किसी को अपने आसपास टीबी के लक्षण वाले मरीज की जानकारी मिलती है तो उसे जिला चिकित्सालय या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजकर जांच और उपचार सुनिश्चित कराया जाए। उन्होंने समाज के हर वर्ग से टीबी मुक्त भारत मिशन में योगदान देने का आह्वान किया।
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. बी. के. पटेल (एसएमओ, पीजीआई आजमगढ़) ने बताया कि जिले में सभी सरकारी जांच केंद्रों पर टीबी की जांच और इलाज पूरी तरह निशुल्क है। टीबी मरीजों का 6 से 9 माह का कोर्स होता है और जांच के बाद दो दिनों के भीतर इलाज शुरू कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि यदि कोई ग्रामीण चिकित्सक या आम व्यक्ति टीबी मरीज को जांच के लिए लाता है और मरीज टीबी पॉजिटिव पाया जाता है, तो उसे प्रोत्साहन भी दिया जाएगा।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. बी. के. पटेल ने जिलाधिकारी रविंद्र कुमार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि आजमगढ़ को युवा उद्यमी रोजगार में प्रदेश में दूसरा स्थान मिला है, जो जनपद के लिए गर्व की बात है। उन्होंने तमसा नदी की स्वच्छता और यूपी दिवस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा जिलाधिकारी को सम्मानित किए जाने का भी उल्लेख किया।
अंत में टीबी मुक्त भारत अभियान में सहयोग देने वाले चिकित्सकों को मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एन. आर. वर्मा द्वारा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ