बिहार में राजद की हार का यूपी की राजनीति पर असर, विपक्षी एकता पर उठे सवाल।
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवपाल यादव के बयान के बाद यूपी की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। शिवपाल यादव ने साफ शब्दों में कहा है कि समाजवादी पार्टी को AIMIM की कोई जरूरत नहीं है और 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर AIMIM से किसी भी तरह के गठबंधन पर न तो कोई बातचीत हुई है और न ही कोई प्रस्ताव विचाराधीन है। उन्होंने कहा कि सपा अपने दम पर चुनाव लड़ने और सरकार बनाने में सक्षम है।
शिवपाल यादव ने यह भी स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी का जनाधार मजबूत है और पार्टी हमेशा अपनी विचारधारा और संगठन की ताकत के सहारे आगे बढ़ी है। उन्होंने कहा कि सपा ने पहले भी अकेले चुनाव लड़कर सरकार बनाई है और आगे भी पार्टी इसी रणनीति के साथ आगे बढ़ेगी।
इधर, बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की हालिया हार के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत में भी हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार के चुनावी नतीजों का असर यूपी की विपक्षी एकता की चर्चाओं पर पड़ सकता है। खासकर सपा, कांग्रेस और AIMIM जैसे दलों के संभावित समीकरणों को लेकर नए सिरे से आकलन किया जा रहा है। बिहार के नतीजों के बाद यूपी में यह सवाल जोर पकड़ रहा है कि क्या विपक्षी दल अलग-अलग चुनाव लड़ेंगे या किसी नए राजनीतिक फार्मूले के तहत मैदान में उतरेंगे। हालांकि शिवपाल यादव के बयान से यह साफ संकेत मिल गया है कि समाजवादी पार्टी फिलहाल किसी नए गठबंधन के मूड में नहीं है और 2027 की तैयारी अकेले दम पर करने की रणनीति पर काम कर रही है। राजनीतिक गलियारों में इस बयान को 2027 के चुनावी शंखनाद के रूप में देखा जा रहा है, जिससे आने वाले दिनों में यूपी की राजनीति और ज्यादा गरमा सकती है।
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