सदर विधानसभा में सपा नेता दुर्गा प्रसाद यादव की चुनौती के बीच बसपा की रणनीति पर नजरें।
मजबूत प्रत्याशी उतारने पर ही बसपा को सदर सीट पर टक्कर देने की उम्मीद।लिए
संवाददाता - राकेश गौतम
आजमगढ़। आजमगढ़ सदर विधानसभा सीट पर आगामी चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री दुर्गा प्रसाद यादव को इस सीट पर एक मजबूत चेहरा माना जाता है, ऐसे में अब सभी की निगाहें बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के संभावित प्रत्याशी पर टिकी हैं कि वह किसे मैदान में उतारकर दुर्गा प्रसाद यादव को चुनौती देगी।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक बसपा इस सीट पर ऐसा प्रत्याशी तलाश रही है, जिसकी दलित समाज में मजबूत पकड़ हो और जो स्थानीय स्तर पर सक्रिय रहा हो। चर्चा है कि पार्टी किसी ऐसे चेहरे पर दांव लगा सकती है, जो संगठनात्मक रूप से मजबूत होने के साथ-साथ गैर-यादव पिछड़ा वर्ग और मुस्लिम मतदाताओं में भी स्वीकार्य हो, ताकि सपा के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाई जा सके।
सदर सीट पर दुर्गा प्रसाद यादव की व्यक्तिगत पकड़, लंबे राजनीतिक अनुभव और क्षेत्र में लगातार सक्रियता को देखते हुए बसपा के लिए मुकाबला आसान नहीं माना जा रहा है। यही कारण है कि पार्टी इस बार किसी बाहरी चेहरे के बजाय स्थानीय और जमीनी नेता को आगे कर सकती है। हालांकि अभी तक बसपा की ओर से किसी नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि बसपा मजबूत और प्रभावशाली प्रत्याशी उतारती है, तो आजमगढ़ सदर में मुकाबला रोचक हो सकता है, वहीं कमजोर प्रत्याशी की स्थिति में चुनाव एकतरफा भी हो सकता है। फिलहाल सदर सीट पर सपा, बसपा और भाजपा तीनों की गतिविधियां बढ़ती नजर आ रही हैं और चुनावी माहौल धीरे-धीरे गर्माने लगा है।
0 टिप्पणियाँ