जमीन के बदले नौकरी घोटाले में लालू परिवार की बढ़ीं मुश्किलें, राउज एवेन्यू कोर्ट ने आरोप तय करने का दिया आदेश!

कोर्ट ने कहा कि रेल मंत्री रहते लालू यादव ने पद का दुरुपयोग किया और मिलीभगत से नियमों को दरकिनार कर नियुक्तियां की गईं, जिसके बदले जमीनें हासिल की! 
नई दिल्ली। जमीन के बदले नौकरी से जुड़े कथित घोटाले में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) प्रमुख और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव तथा उनके परिवार की कानूनी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने इस मामले में लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटी मीसा भारती, बेटे तेजस्वी यादव सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया है।
विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने अपने आदेश में कहा कि पूर्व रेल मंत्री रहते हुए लालू प्रसाद यादव ने अपने पद का दुरुपयोग किया और आपराधिक साजिश के तहत रेलवे में नियुक्तियों को प्रभावित किया। अदालत के अनुसार, रेल अधिकारियों और करीबी सहयोगियों की मिलीभगत से यादव परिवार के नाम या उनके नजदीकी लोगों के नाम पर जमीनें हासिल की गईं। अदालत ने इस मामले में कुल 41 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए हैं, जबकि 52 आरोपियों को क्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया है। इनमें कुछ रेल अधिकारी भी शामिल हैं। सीबीआई की ओर से दाखिल चार्जशीट में कुल 103 आरोपियों के नाम थे, जिनमें से अब तक पांच की मृत्यु हो चुकी है।
अधिवक्ता अजाज अहमद के अनुसार, कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव, मीसा भारती, तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव और हेमा यादव के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 120बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 के तहत आरोप तय करने का निर्देश दिया है। औपचारिक रूप से आरोप 29 जनवरी को तय किए जाएंगे।
सीबीआई का आरोप है कि वर्ष 2004 से 2009 के बीच, जब लालू यादव रेल मंत्री थे, उस दौरान भारतीय रेलवे के पश्चिम मध्य क्षेत्र (जबलपुर) में ग्रुप-डी पदों पर नियुक्तियां नियमों को दरकिनार कर की गईं। इन पदों पर उन्हीं लोगों को नौकरी दी गई, जिन्होंने लालू यादव के परिवार या उनके करीबी लोगों के नाम पर जमीन उपहार में दी या ट्रांसफर की। जांच एजेंसी का दावा है कि इन लेन-देन में बेनामी संपत्तियां भी शामिल थीं, जो आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार के दायरे में आती हैं।
कोर्ट के इस फैसले के बाद एक बार फिर बिहार और राष्ट्रीय राजनीति में इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

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