आजमगढ़ : जश्न-ए-सब्र-ओ-वफ़ा ने बिखेरा रूहानियत का रंग, कर्बला के पैग़ाम ने जोड़े दिल।

वक्ताओं ने कहा कि इमाम हुसैन (अ.स.) का जीवन इंसाफ़ और सच्चाई का प्रतीक है, जबकि मौला अब्बास (अ.स.) की वफ़ादारी और बहादुरी आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक मिसाल है।
संवाददाता - नासिर हुसैन
आज़मगढ़। जनपद के कुंडीगढ़ (कटरा क्षेत्र) में Al Mujtaba Foundation की ओर से इमाम हुसैन (अ.स.) और मौला अब्बास (अ.स.) के जन्मदिन के अवसर पर जश्न-ए-सब्र-ओ-वफ़ा का आयोजन अकीदत और खुशी के साथ किया गया। यह रूहानी महफ़िल स्वर्गीय मुज्तबा हुसैन साहब के आवास पर आयोजित हुई, जिसमें बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत की।
कार्यक्रम की शुरुआत सागर आज़मी द्वारा हदीस-ए-क़िसा की तिलावत से हुई। इसके बाद नात और मनक़बत का सिलसिला चला। शायरों और वक्ताओं ने अपने कलाम के ज़रिये कर्बला की कुर्बानी, सब्र, इंसाफ़ और वफ़ादारी के पैग़ाम को प्रभावशाली अंदाज़ में पेश किया। महफ़िल के दौरान “वाह-वाह” और “सुभानअल्लाह” की सदाओं से माहौल पूरी तरह रूहानियत में डूबा रहा। वक्ताओं ने कहा कि इमाम हुसैन (अ.स.) का जीवन इंसाफ़ और सच्चाई का प्रतीक है, जबकि मौला अब्बास (अ.स.) की वफ़ादारी और बहादुरी आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक मिसाल है। शायरों के अशआर सुनकर अकीदतमंद झूम उठे।
महफ़िल में बुज़ुर्गों के साथ-साथ युवाओं और बच्चों की भी सक्रिय भागीदारी रही। पूरे कार्यक्रम के दौरान अमन, भाईचारे और सामाजिक एकता का संदेश दिया गया। नियाज़ की बेहतर व्यवस्था की गई, जिसकी सभी ने सराहना की।
कार्यक्रम का आयोजन तनवीर हुसैन रिज़वी और मोहम्मद अहमद साहब द्वारा किया गया। महफ़िल इमामे जुमा अलिजनाब मज़ाहिर हुसैन साहब की सरपरस्ती में संपन्न हुई। समापन पर अलिजनाब सुल्तान हुसैन साहब ने मुल्क में अमन-चैन और भाईचारे की विशेष दुआ कराई।
महफ़िल में शिया कमेटी अध्यक्ष अज़ादार हुसैन (चुन्ना भाई), असलम चतुर्वेदी, फ़िरोज़ हैदर बिलहरी, मुदस्सिर हुसैन, खुशहाल रिज़वी, यासूब अब्बास, जमील हैदर, इंक़लाब आज़मी सहित अन्य लोगों ने कलाम पेश किया। कार्यक्रम की निज़ामत सागर आज़मी और ज़हीर आज़मी ने की।
जश्न-ए-सब्र-ओ-वफ़ा ने कुंडीगढ़ क्षेत्र में रूहानियत की गहरी छाप छोड़ते हुए सामाजिक सौहार्द और भाईचारे का मजबूत संदेश दिया।

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