मंत्री कपिल देव अग्रवाल के झूठे दावे की पोल खुली: PM आवास के फ्लैट अधूरे, न बिजली-पानी, न खिड़कियां।

 ब्यूरो प्रमुख - योगेश कुमार 
मुजफ्फरनगर। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनाए गए फ्लैट्स को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। भोपा रोड स्थित मखियाली में बने 224 फ्लैट्स की चाबियां वितरण के बाद लाभार्थियों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। कारण साफ है—फ्लैट्स अभी पूरी तरह तैयार ही नहीं हैं, जबकि उन्हें जल्दबाजी में आवंटित कर दिया गया।
बीते शनिवार को राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने एक कार्यक्रम के दौरान लाभार्थियों को फ्लैट्स की चाबियां सौंपी थीं। इस मौके पर उन्होंने दावा किया था कि “इस बार सभी लाभार्थी अपने नए घर में होली और ईद मनाएंगे।”हालांकि, जब लाभार्थी अपने-अपने फ्लैट्स का निरीक्षण करने पहुंचे तो जमीनी हकीकत मंत्री के दावे से बिल्कुल उलट निकली। फ्लैट्स में न बिजली की व्यवस्था है, न पानी की सप्लाई। कई फ्लैट्स में फर्श अधूरा है, टाइल्स और पत्थर का काम पूरा नहीं हुआ है और फिनिशिंग भी अधूरी पड़ी हैसबसे चिंताजनक स्थिति खिड़कियों की पाई गई। कई फ्लैट्स में खिड़कियों में शीशे लगे ही नहीं हैं, जबकि कुछ में खिड़कियां टूटी हुई हैं। ऊपरी मंजिलों के फ्लैट्स में केवल जंग लगी लोहे की फ्रेम नजर आती हैं। इसके अलावा, कई जगह दीवारों का प्लास्टर उखड़ा हुआ है, जिससे निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।लाभार्थियों का कहना है कि उन्हें बिना बुनियादी सुविधाओं के ही फ्लैट्स की चाबियां थमा दी गईं। लाभार्थी प्रतिभा शर्मा ने बताया कि उन्हें F-50 फ्लैट आवंटित हुआ है, लेकिन वहां न बिजली है और न पानी। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में फ्लैट में रहना संभव नहीं है और होली मनाने का दावा पूरी तरह खोखला साबित होता है।
वहीं, एक अन्य लाभार्थी अंजुम ने भी अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि फ्लैट्स अभी रहने लायक नहीं हैं। उन्होंने कहा कि जब पानी और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं ही नहीं हैं, तो ईद कैसे मनाई जा सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि किराए के घर से बेहतर अपना घर होता है, लेकिन अधूरी सुविधाएं बड़ी समस्या हैं।
गौरतलब है कि 25 अगस्त 2025 को खुद मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने इन फ्लैट्स के निर्माण में घटिया सामग्री के इस्तेमाल का मामला पकड़ा था और जांच के निर्देश दिए थे। उस समय सख्त कार्रवाई की बात कही गई थी, लेकिन अब तक उस जांच का कोई स्पष्ट परिणाम सामने नहीं आया है।
वहीं, मौके पर काम कर रहे ठेकेदार का कहना है कि फ्लैट्स को पूरी तरह तैयार करने के लिए अभी लगभग 40 दिन और लगेंगे। ऐसे में सवाल उठता है कि जब निर्माण कार्य पूरा ही नहीं हुआ था, तो लाभार्थियों को चाबियां सौंपने की इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई गई।
पूरे मामले ने प्रशासन और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि क्या इस मामले में जिम्मेदारों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई होती है या नहीं, और कब तक इन फ्लैट्स को रहने योग्य बनाया जाता है।

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