UP शिक्षक भर्ती पर सरकार की चुप्पी, सदन में उठा युवाओं की नाराजगी का मुद्दा।

लंबे समय से भर्ती न आने से बढ़ी हताशा, सपा विधायक अनिल प्रधान ने घेरा सरकार को।
बेसिक शिक्षा मंत्री ने स्कूल बंद होने से किया इनकार, लेकिन भर्ती पर साधी चुप्पी।
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के विधायक अनिल प्रधान ने विधानसभा में उत्तर प्रदेश में लंबे समय से शिक्षक भर्ती न होने का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने कहा कि वर्षों से कोई भी नई शिक्षक भर्ती न आने के कारण प्रदेश का शिक्षित युवा गहरी निराशा और नाराजगी में है। हालात यह हैं कि लाखों युवा मजबूरी में दूसरे राज्यों में नौकरी और अवसर तलाशने को मजबूर हो रहे हैं।
विधायक अनिल प्रधान ने कहा कि एक तरफ सरकार शिक्षा को प्राथमिकता देने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी बनी हुई है। उन्होंने शिक्षा मित्रों और अनुदेशकों के मानदेय बढ़ाने, गांवों के स्कूलों की जर्जर स्थिति और शिक्षा की गिरती गुणवत्ता का मुद्दा भी सदन में उठाया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई ग्रामीण इलाकों में स्कूलों की स्थिति इतनी खराब है कि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और अभिभावकों का सरकारी शिक्षा व्यवस्था से भरोसा उठता जा रहा है।
इस पर जवाब देते हुए बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने सदन में कहा कि उत्तर प्रदेश में किसी भी प्राथमिक विद्यालय को बंद नहीं किया गया है। हालांकि, मंत्री अपने जवाब में शिक्षक भर्ती जैसे सबसे अहम सवाल पर पूरी तरह चुप नजर आए। उन्होंने न तो आगामी भर्ती को लेकर कोई जानकारी दी और न ही इस विषय पर कोई ठोस चर्चा की। शिक्षा मंत्री की यह चुप्पी युवाओं और शिक्षार्थियों के लिए निराशाजनक मानी जा रही है। विपक्ष का कहना है कि जब लंबे समय से भर्ती न आने से युवा हताश हैं, ऐसे में सरकार का इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट जवाब न देना यह दर्शाता है कि सरकार के पास न तो कोई ठोस योजना है और न ही युवाओं की चिंता।
सपा विधायकों ने सदन में सरकार पर आरोप लगाया कि शिक्षक भर्ती जैसे संवेदनशील और भविष्य से जुड़े मुद्दे को नजरअंदाज कर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को और कमजोर किया जा रहा है। विपक्ष ने मांग की कि सरकार जल्द से जल्द शिक्षक भर्ती को लेकर स्पष्ट रोडमैप पेश करे, ताकि युवाओं का भरोसा दोबारा बहाल हो सके।

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