आजमगढ़ : कवि सम्मेलन के माध्यम से डॉ. कन्हैया सिंह को श्रद्धांजलि।

द्वितीय पुण्यतिथि पर साहित्य और भावनाओं का संगम।
राष्ट्रीय कवियों की प्रस्तुतियों से गूंजा हरिऔध कला केंद्र।
संवाददाता - राकेश गौतम 
आजमगढ़। प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक एवं वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. कन्हैया सिंह की द्वितीय पुण्यतिथि के अवसर पर हरिऔध कला केंद्र में भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। जनमानस के सैलाब के बीच आयोजित इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से आए कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से डॉ. सिंह को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ. विनम्रसेन ने भावुक पंक्तियों के साथ मंच से कवियों का आह्वान किया। 
दिल्ली से आए अभिसार शुक्ल ‘गीता’ ने जीवन-संघर्ष और धर्मयुद्ध के द्वंद को रेखांकित करती पंक्तियां सुनाईं। लखनऊ के कवि अभय ‘निर्भीक’ ने आजमगढ़ की साहित्यिक क्षति को स्वर देते हुए श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। इंदौर से आए कवि अमन ‘अक्षर’ ने बुजुर्गों के सम्मान और पारिवारिक मूल्यों पर मार्मिक प्रस्तुति दी, जबकि दिल्ली की कवयित्री मनु ‘वैशाली’ ने गांवों के महत्व और राधा-कृष्ण के अमर प्रेम पर आधारित रचनाएं सुनाकर खूब तालियां बटोरीं। युवा कवि संक्षेप ‘अक्षत’ ने व्यवस्था और नैतिकता पर सवाल उठाती कविता से श्रोताओं को सोचने पर मजबूर कर दिया। कवि सम्मेलन के अंतिम सत्र में पहुंचे राज्यमंत्री दानिश आज़ाद अंसारी का डॉ. सिंह के परिजनों एवं आयोजकों द्वारा सम्मान किया गया। कार्यक्रम में साहित्यकारों, जनप्रतिनिधियों, शिक्षाविदों, चिकित्सकों, एनसीसी-एनएसएस कैडेट्स सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक अंत तक उपस्थित रहे और कविताओं का रसास्वादन किया। समूचा आयोजन साहित्य, स्मृति और संवेदना का ऐसा संगम बना, जिसमें डॉ. कन्हैया सिंह की विचारधारा और रचनात्मक विरासत को भावपूर्ण नमन किया गया।

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