मुजफ्फरनगर: सोमवती अमावस्या पर शुक्रताल में सुरक्षा सख्त, मगर…स्वच्छता के दावों ने कराई किरकीरी।

संवाददाता : योगेश कुमार 
शुक्रतीर्थ (मुफ्फरनगर)। पौराणिक एवं ऐतिहासिक तीर्थ नगरी शुक्रताल (शुकतीर्थ) में सोमवार को सोमवती अमावस्या के पावन अवसर पर श्रद्धा और आस्था का जबरदस्त जनसैलाब उमड़ पड़ा। दिल्ली, हरियाणा, नोएडा, शामली, बागपत और सहारनपुर सहित देश के विभिन्न हिस्सों से आए हजारों श्रद्धालुओं ने पतित पावनी गंगा में डुबकी लगाई। इस बड़े आयोजन को देखते हुए जहां एक तरफ पुलिस प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पूरी तरह अलर्ट मोड पर रहा, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय नगर निकाय और प्रशासन की सफाई व्यवस्था के दावे पूरी तरह खोखले साबित हुए। 
एसपी ग्रामीण ने खुद संभाला मोर्चा, परखी सुरक्षा व्यवस्था- शुक्रतीर्थ के मौके पर भीड़ की भारी संभावना को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ग्रामीण अक्षय संजय महाडीक ने गंगा स्थान से पहले ही थाना भोपा क्षेत्र स्थित शुक्रताल का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने गंगा घाट, मुख्य मार्ग, मेला परिसर और पार्किंग स्थलों का बारीकी से जायजा लिया। उन्होंने ड्यूटी पर तैनात पुलिस बल को सतर्कता एवं संवेदनशीलता के साथ जिम्मेदारी निभाने के निर्देश दिए। एसपी ग्रामीण ने स्पष्ट कहा कि ड्यूटी में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए उन्होंने निर्देश दिए कि सभी प्रमुख घाटों पर कुशल गोताखोरों और नावों की तैनाती सुनिश्चित हो। महिला श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए महिला पुलिस बल मुस्तैद रहे। पूरे मेला क्षेत्र की सीसीटीवी कैमरों और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग के जरिए कड़ी निगरानी रखी जाए। जाम की स्थिति से निपटने के लिए यातायात डायवर्जन प्लान सख्ती से लागू किया जाए।पुलिस प्रशासन ने जहां अपनी जिम्मेदारी बखूबी संभाली, वहीं नागरिक सुविधाओं और स्वच्छता के मोर्चे पर संबंधित विभाग पूरी तरह फेल नजर आया। मुख्य गंगा घाट से लेकर मेला परिसर तक जगह-जगह कूड़े-कचरे के ढेर दिखाई दिए। सबसे बदतर स्थिति गंगा जी की मुख्य धारा में देखने को मिली, जहां भारी मात्रा में जलकुंभी बहकर घाटों के किनारे जमा हो गई थी। इससे स्नान करने आए श्रद्धालुओं, विशेषकर महिलाओं और बुजुर्गों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी।शुक्रताल में इस बड़े पर्व पर पुलिस की मुस्तैदी की तो सराहना हुई, लेकिन नगर पंचायत और स्थानीय प्रशासन की ढिलाई ने मेले के रंग को फीका कर दिया। श्रद्धालुओं का कहना है कि यदि समय रहते घाटों से कचरा साफ किया जाता और बैरिकेडिंग लगाकर जलकुंभी को रोका जाता, तो तीर्थयात्रियों को यह कड़वा अनुभव नहीं होता। एसपी ग्रामीण ने श्रद्धालुओं से भी अपील की है कि वे गहरे पानी में न जाएं और सुरक्षा व्यवस्था में सहयोग करें, लेकिन लोगों का मानना है कि जब तक स्वच्छता पर ध्यान नहीं दिया जाएगा, तब तक तीर्थस्थलों की छवि को सुधारना मुश्किल होगा

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