नई दिल्ली। दिल्ली में टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी की कांग्रेस नेतृत्व सोनिया गांधी और राहुल गांधी से मुलाकात के बाद सियासी गलियारों में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। राजनीतिक हलकों में यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि भविष्य में टीएमसी और कांग्रेस के रिश्ते और मजबूत हो सकते हैं। हालांकि टीएमसी की ओर से किसी भी संभावित विलय की खबरों का आधिकारिक समर्थन नहीं किया गया है।
इसी बीच सोशल मीडिया पर बहुजन समाज पार्टी और तृणमूल कांग्रेस टीएमसी की तुलना को लेकर बहस तेज हो गई है। बसपा समर्थकों का कहना है कि ममता बनर्जी और मायावती की सीधी तुलना करना उचित नहीं है, क्योंकि टीएमसी मूल रूप से एक क्षेत्रीय पार्टी रही है, जबकि बसपा राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान रखने वाली पार्टी है। समर्थकों का तर्क है कि यदि किसी राजनीतिक दल के कांग्रेस में विलय की चर्चाएं सामने आती हैं, तो यह उसके नेतृत्व और संगठन को लेकर उठ रहे सवालों की ओर भी संकेत करता है। वहीं बसपा करीब 15 वर्षों से सत्ता से बाहर रहने के बावजूद आज भी अपनी स्वतंत्र पहचान, संगठन और चुनाव चिन्ह के साथ खड़ी है।
0 टिप्पणियाँ