आयोग ने मीडिया, संस्थानों और आम नागरिकों से अपमानजनक शब्दों के प्रयोग से बचने की अपील की, कानूनी कार्रवाई की चेतावनी।
संवाददाता -अबुल कैश
आजमगढ़/नई दिल्ली। भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग (NCISM) ने 29 जुलाई 2026 को जारी एक महत्वपूर्ण परिपत्र में स्पष्ट किया है कि BAMS, BUMS, BSMS और BSRMS जैसी मान्यता प्राप्त डिग्रियों वाले तथा विधिवत पंजीकृत आयुष चिकित्सकों को सार्वजनिक रूप से "झोलाछाप" या "फर्जी डॉक्टर" कहना कानून सम्मत नहीं है। आयोग ने कहा कि ऐसे शब्दों का प्रयोग संबंधित चिकित्सकों की प्रतिष्ठा और उनके वैधानिक अधिकारों का उल्लंघन माना जा सकता है।
परिपत्र के अनुसार, NCISM अधिनियम, 2020 के तहत पंजीकृत भारतीय चिकित्सा पद्धति के चिकित्सक विधिक रूप से मान्यता प्राप्त स्वास्थ्य सेवा पेशेवर हैं। उन्हें कानून द्वारा निर्धारित अधिकार प्राप्त हैं और उनकी पेशेवर गरिमा का सम्मान किया जाना आवश्यक है।
आयोग ने मीडिया संस्थानों, विभिन्न संगठनों और आम नागरिकों से अपील की है कि वे पंजीकृत आयुष चिकित्सकों के लिए अपमानजनक या भ्रामक शब्दों का प्रयोग न करें। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति या संस्था सार्वजनिक रूप से ऐसे शब्दों का उपयोग करती है, तो इसे संबंधित चिकित्सकों के अधिकारों के उल्लंघन के रूप में देखा जा सकता है और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
इस निर्देश के बाद विभिन्न राज्यों के आयुष चिकित्सकों में खुशी का माहौल है। उनका कहना है कि आयोग के इस कदम से आयुष चिकित्सा पद्धति से जुड़े पंजीकृत चिकित्सकों की गरिमा और सम्मान को और अधिक मजबूती मिलेगी।
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