केजरीवाल, अखिलेश, चंद्रशेखर आजाद, संजय राउत और पवन खेड़ा समेत कई नेताओं ने कार्रवाई की आलोचना की, संवाद की बजाय बल प्रयोग का लगाया आरोप।
नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को वहां से हटाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। विपक्षी दलों के कई प्रमुख नेताओं ने इस कार्रवाई की आलोचना करते हुए केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन का आरोप लगाया है।
भीम आर्मी प्रमुख एवं सांसद चंद्रशेखर आजाद ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए इस घटना को लोकतंत्र के लिए शर्मनाक बताया। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सरकार को वांगचुक से बातचीत करनी चाहिए थी, लेकिन इसके बजाय उन्हें जबरन हटाया गया। उन्होंने इसे सरकार का अहंकार बताया।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इस कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति को आमरण अनशन स्थल से बलपूर्वक हटाना अत्यंत निंदनीय है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इसे नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों पर हमला करार दिया। शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने कहा कि सोनम वांगचुक 20 दिनों से अधिक समय से अनशन पर थे और उनका आंदोलन लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने समय रहते संवाद नहीं किया और जब उनकी तबीयत गंभीर हुई तो उन्हें जबरन अस्पताल ले जाया गया। राउत ने इस कार्रवाई से जुड़ी तस्वीर साझा करते हुए इसे "तानाशाही के अंत की शुरुआत" बताया।
इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है। विपक्ष लगातार सरकार से इस कार्रवाई पर जवाब मांग रहा है, जबकि इस पूरे मामले को लेकर देशभर में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चाएं जारी हैं।
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