बड़ी खबर: पेपर लीक कानून पर मायावती का बड़ा सवाल "सिर्फ सख्त सजा नहीं, शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार भी जरूरी"

बसपा प्रमुख बोलीं— अपराध होने के बाद कार्रवाई नहीं, पहले रोकथाम हो प्राथमिकता; संसद में गंभीर बहस के बजाय आरोप-प्रत्यारोप पर जताई चिंता।
नई दिल्ली। पेपर लीक रोकथाम को लेकर संसद से पारित नए कानून पर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसे जघन्य अपराध पर सख्त कानून बनाना स्वागतयोग्य कदम है, लेकिन केवल कठोर सजा का प्रावधान इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता। उनका कहना है कि सरकार को अपराध होने के बाद दंड देने के बजाय ऐसी व्यवस्था विकसित करनी चाहिए, जिससे पेपर लीक जैसी घटनाओं को पहले ही रोका जा सके।
मायावती ने कहा कि पेपर लीक की घटनाओं से लाखों मेहनती छात्र-छात्राओं का भविष्य प्रभावित होता है। कई बार निराशा में युवा आत्महत्या जैसे कदम भी उठा लेते हैं, इसलिए इस समस्या का समाधान केवल कानून तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार, सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता बढ़ाने, शिक्षा को अधिक सुलभ और रोजगारोन्मुख बनाने तथा गरीब और वंचित वर्ग के विद्यार्थियों को समान अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया।
बसपा प्रमुख ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त कमियों को दूर किए बिना पेपर लीक जैसी घटनाओं पर पूरी तरह अंकुश लगाना संभव नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावशाली और संपन्न वर्ग के लोगों को बेहतर संसाधन आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं, जबकि गरीब परिवारों के प्रतिभाशाली बच्चे कई कठिनाइयों का सामना करते हैं। ऐसे में शिक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और समान अवसर देने वाली बनाना समय की आवश्यकता है।
मायावती ने संसद में हुई बहस पर भी चिंता जताते हुए कहा कि इतने गंभीर विषय पर सभी दलों को राजनीति से ऊपर उठकर चर्चा करनी चाहिए थी, लेकिन सदन में आरोप-प्रत्यारोप अधिक देखने को मिले। उन्होंने सरकार से अपील की कि नए कानून के साथ-साथ तकनीकी निगरानी, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और प्रशासनिक सुधार जैसे प्रभावी कदम भी उठाए जाएं, ताकि देश के युवाओं का भविष्य सुरक्षित रह सके।

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