सोनम वांगचुक के आंदोलन पर विपक्ष सक्रिय, बसपा की चुप्पी पर राजनीतिक चर्चाएं तेज।

अन्ना हजारे आंदोलन से निकले राजनीतिक घटनाक्रम की हो रही चर्चा, विभिन्न दलों की रणनीति पर उठ रहे सवाल।
नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक और सीजेपी (CJP) से जुड़े कार्यकर्ताओं के आंदोलन तथा लंबे समय तक चले अनशन को लेकर देश की राजनीति में अलग-अलग दलों की अलग-अलग रणनीति देखने को मिल रही है। आम आदमी पार्टी, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, भीम आर्मी सहित कई विपक्षी दलों के नेताओं ने समय-समय पर आंदोलन के प्रति समर्थन या सहानुभूति व्यक्त की है। वहीं, बहुजन समाज पार्टी की ओर से इस विषय पर अब तक कोई सार्वजनिक आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसे लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में विभिन्न प्रकार की चर्चाएं चल रही हैं।https://www.facebook.com/share/p/196a1sBCtU/ राजनीतिक विश्लेषकों के बीच इस घटनाक्रम की तुलना वर्ष 2011 के अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से भी की जा रही है। उस समय लोकपाल की मांग को लेकर चले जन आंदोलन को कांग्रेस सहित कई दलों के नेताओं ने अलग-अलग समय पर प्रतिक्रिया दी थी। बाद के वर्षों में अन्ना हजारे आंदोलन से जुड़े प्रमुख चेहरों में से एक अरविंद केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी का गठन किया, जिसने दिल्ली में कांग्रेस को सत्ता से बाहर कर दिया और बाद में पंजाब में भी कांग्रेस को चुनावी हार का सामना करना पड़ा।
इसी पृष्ठभूमि को देखते हुए कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान में विपक्षी दल किसी भी जन आंदोलन के प्रति समर्थन देने से पहले उसके संभावित राजनीतिक प्रभावों का आकलन कर रहे हैं। हालांकि, यह विश्लेषण राजनीतिक टिप्पणियों पर आधारित है और संबंधित दलों ने इसे अपनी आधिकारिक रणनीति के रूप में सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं किया है।
उधर, बहुजन समाज पार्टी ने अभी तक सोनम वांगचुक के आंदोलन पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। आपको बता दे की बसपा के कई बड़े समर्थको ने इस आंदोलन को समर्थन दिया है। परन्तु पार्टी की इस चुप्पी को लेकर समर्थकों और राजनीतिक पर्यवेक्षकों के बीच अलग-अलग तरह की व्याख्याएं की जा रही हैं। फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम पर सभी दलों की आगे की राजनीतिक रणनीति और आधिकारिक प्रतिक्रियाओं पर नजर बनी हुई है।

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