बड़ी खबर : नंदीग्राम उपचुनाव पर कांग्रेस-टीएमसी में घमासान, सीट छोड़ने के दावे से गरमाई बंगाल की सियासत।

कांग्रेस का दावा- टीएमसी ने केंद्रीय नेतृत्व से किया था संपर्क, बदले में रेजीनगर सीट की थी मांग; तृणमूल ने प्रस्ताव की बात से किया इनकार।
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव को लेकर कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बीच सियासी खींचतान तेज हो गई है। कांग्रेस ने दावा किया है कि टीएमसी की ओर से उसके केंद्रीय नेतृत्व से संपर्क कर नंदीग्राम सीट कांग्रेस के लिए छोड़ने का प्रस्ताव दिया गया था। इसके बदले रेजीनगर सीट पर कांग्रेस से समर्थन की अपेक्षा जताई गई थी। हालांकि, टीएमसी नेताओं ने कांग्रेस के इस दावे को खारिज किया है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप भट्टाचार्य के मुताबिक, करीब 15 दिन पहले दिल्ली में कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता से संपर्क किया गया था। कथित प्रस्ताव में नंदीग्राम से कांग्रेस और रेजीनगर से टीएमसी के चुनाव लड़ने की बात थी। कांग्रेस नेतृत्व ने इस पर प्रदेश नेताओं से चर्चा की, जिसके बाद तत्काल किसी समझौते के पक्ष में सहमति नहीं बनी।
दूसरी ओर, टीएमसी नेता कुणाल घोष ने ऐसे किसी प्रस्ताव की बात से इनकार किया है। दोनों दलों के अलग-अलग रुख ने बंगाल में विपक्षी दलों के बीच चुनावी तालमेल को लेकर चर्चाएं बढ़ा दी हैं।
नंदीग्राम उपचुनाव का घटनाक्रम बाद में एक और मोड़ ले चुका है। टीएमसी उम्मीदवार संचिता प्रधान डे के नामांकन वापस लेने के बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने की घोषणा की थी। ममता ने राहुल गांधी से बातचीत और विपक्षी एकजुटता का भी उल्लेख किया।
ऐसे में नंदीग्राम अब केवल एक विधानसभा सीट का उपचुनाव नहीं रह गया है, बल्कि कांग्रेस और टीएमसी के बीच राज्य की राजनीति में संबंधों और संभावित चुनावी तालमेल को लेकर भी चर्चा का केंद्र बन गया है।

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