बसपा सुप्रीमो ने आपसी अविश्वास, जातिवाद और कटु टिप्पणियों पर उठाए सवाल, महंगाई, बेरोजगारी और गरीबी जैसी समस्याओं पर ध्यान देने की अपील!
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने भारतीय राजनीति में पक्ष और विपक्ष के नेताओं के बीच बढ़ती बयानबाजी, आपसी कटुता और व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि राजनीति में असहमति होना स्वाभाविक है, लेकिन इसका स्तर गिरकर अमर्यादित, अपमानजनक और जातिवादी टिप्पणियों तक पहुंचना देश की गरिमा तथा लोकतांत्रिक परंपराओं के लिए चिंताजनक है।
मायावती ने सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में कहा कि देश की राजनीति में आपसी अविश्वास, द्वेष और आरोप-प्रत्यारोप का स्तर लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों और राजनीतिक मर्यादा के लिहाज से उचित नहीं बताया। उनके मुताबिक, राजनीतिक विरोध के बावजूद नेताओं को एक-दूसरे के प्रति सम्मानजनक भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए।
बसपा प्रमुख ने कहा कि शीर्ष स्तर पर बैठे नेताओं के बीच भी यदि एक-दूसरे के प्रति सम्मान की कमी होगी, तो इससे आपत्तिजनक और विषैली राजनीति को बढ़ावा मिल सकता है। ऐसी स्थिति में जनता का राजनीतिक व्यवस्था पर भरोसा कमजोर होने का खतरा है। उन्होंने संकीर्ण और गरीब-विरोधी स्वार्थ की राजनीति से बचने की जरूरत पर भी जोर दिया।
मायावती ने सरकारी स्तर पर भ्रष्टाचार और चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठने वाले सवालों का जिक्र करते हुए कहा कि इन परिस्थितियों से जनता में पहले से ही बेचैनी है। ऐसे समय में नेताओं के बीच बढ़ती बयानबाजी राजनीतिक माहौल को और खराब कर सकती है।
उन्होंने कहा कि आम जनता की प्रमुख चिंताएं बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और गरीबी जैसी समस्याएं हैं। इसलिए सभी राजनीतिक दलों और उनके नेताओं को व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप में उलझने के बजाय जनहित के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
मायावती ने सभी दलों से राजनीतिक संवाद में संयम, शालीनता और जिम्मेदारी बनाए रखने की अपील की। उनका संदेश है कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए राजनीतिक मतभेदों के बीच भी आपसी सम्मान और जनहित को प्राथमिकता देना आवश्यक है।
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